हाल के वर्षों में आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर कई आंदोलनों का नेतृत्व करने वाले नागरिक समाज संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर पाकिस्तानी सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में अशांति फैल गई है। जानकारी के अनुसार, 9 जून को प्रस्तावित विभागीय बंद के मद्देनजर रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के हमलें में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 70 से अधिक लोग घायल हो गए। इससे पहले की गई गोलीबारी में कार्यकर्ता का शव अस्पताल के शवगृह (मोर्चरी) में लाया गया था। जब जेएएसी (JAAC) के समर्थक उस शवगृह के बाहर जमा हुए, तब यह हिंसा भड़क उठी।
पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों ने JAAC से जुड़े प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हिंसा का प्रयोग किया। इस संगठन को क्षेत्रीय प्रशासन ने पिछले सप्ताह आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया। पुंछ सेक्टर के आयुक्त सरदार वाहिद खान ने दावा किया कि आंदोलनकारियों से संघर्ष के दौरान चार पुलिस अधिकारी और एक राहगीर की मौत हो गई। साथ ही इस बात की पुष्टी कर बताया की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (सुरक्षा बलों) की कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए।
अधिकारियों ने इस कार्रवाई के दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी की भी पुष्टि की। हालांकि, स्थानीय निवासियों और जेएएसी (JAAC) समर्थकों ने आधिकारिक बयानों को चुनौती दी है और बताया है की असल में मृतकों का आंकड़ा इससे कहीं अधिक है।
कश्मीर से बाहर, पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले कश्मीरियों के लिए 45 सदस्यीय विधानसभा में 12 सीटें आरक्षित करने के फैसले के कारण यह ताजा विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। जेएएसी का तर्क है कि इन सीटों के कारण स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है और उन्होंने इस व्यवस्था को रद्द करने की मांग की है। इस मोर्चे ने महंगाई, बिजली की किल्लत, बेरोजगारी, प्रशासनिक समस्याओं और उनके अनुसार इस क्षेत्र की हो रही राजनीतिक उपेक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। पिछले दो वर्षों से, इस समूह ने आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं, जिनमें से कई आंदोलन सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष पर खत्म हुए।
9 जून को प्रस्तावित बंद न केवल आरक्षित सीटों का विरोध करने के लिए, बल्कि संगठन पर लगे प्रतिबंध, इंटरनेट पर पाबंदियों और अपने एक नेता की हत्या के विरोध में भी बुलाया गया था। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने इस हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की और आतंकवाद विरोधी कानून के तहत जेएएसी पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर सवाल उठाए। आयोग ने कहा, “हालांकि संवाद आवश्यक है, लेकिन इस क्षेत्र के लोगों को उनके राजनीतिक अधिकारों से लगातार वंचित रखे जाने के माहौल में यह सार्थक नहीं हो सकता। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार बरकरार रखा जाना चाहिए और शिकायतों का पारदर्शी तरीके से निवारण किया जाना चाहिए।”
27 जुलाई को होने वाले चुनावों के मद्देनजर पाकिस्तान ने पूरे इलाके में सेना तैनाती कड़ी कर दी है। कई हिस्सों में मोबाइल डेटा सेवाएं बंद कर दी गई हैं, बड़ी सभाओं (इकट्ठा होने) पर रोक लगा दी गई है और जेएएसी (JAAC) का केंद्रीय कार्यालय भी सील कर दिया गया है। बिगड़ी सुरक्षा स्थिति के कारण यूनाइटेड किंगडम (UK), ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भी अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी एडवाइजरी (Travel Advisory) जारी की है।
यह भी पढ़ें:
हर्निया से बचाव में मददगार उपविष्ठ कोणासन, साइटिका में भी मिल सकती है राहत!
पॉज, ब्रीद, रीकनेक्ट : आयुष मंत्रालय ने सिखाई ध्यान की आसान तकनीक!
8 गोल्ड और 9 ब्रॉन्ज मेडल के साथ भारत ने उलानबातर ओपन का समापन किया!
“सावधान रहें, अकेले पड़ जाएंगे!” ट्रंप की नेतन्याहू को फिर चेतावनी
