उत्तर और मध्य भारत में एक बार फिर भीषण गर्मी का दौर लौटने वाला है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 8 जून से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ेगा और कुछ क्षेत्रों में पारा 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। गर्मी का सबसे तीव्र असर 10 और 11 जून के आसपास देखने को मिल सकता है।
स्वतंत्र मौसम विशेषज्ञ नवदीप दहिया के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों की मामूली राहत के बाद उत्तर भारत में गर्म हवाओं का प्रभाव फिर बढ़ने लगा है। दिन के समय अधिकतम तापमान 42 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।
क्यों बढ़ रही है गर्मी?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार तापमान में तेजी से वृद्धि का मुख्य कारण उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे “एडवेक्शन” कहा जाता है, यानी हवा के माध्यम से गर्मी का एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना।
ये हवाएं थार रेगिस्तान और राजस्थान के शुष्क इलाकों से होकर गुजरती हैं और रास्ते में अधिक गर्मी अपने साथ लेकर आती हैं। इन्हें आम भाषा में “लू” कहा जाता है। ये हवाएं वातावरण और मानव शरीर दोनों से नमी को तेजी से कम कर देती हैं, जिससे गर्मी का प्रभाव और अधिक महसूस होता है।
आसमान में बन रहा है ‘हीट डोम’
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल गर्म हवाएं ही नहीं, बल्कि ऊपरी वायुमंडल में बना उच्च दबाव क्षेत्र भी तापमान बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसे एंटी-साइक्लोन या “हीट डोम” की स्थिति कहा जाता है।
इस स्थिति में ऊपर से नीचे की ओर दबाव बनने के कारण हवा और अधिक गर्म हो जाती है। साथ ही बादल बनने की संभावना कम हो जाती है, जिससे जून की तेज धूप सीधे धरती तक पहुंचती है और तापमान तेजी से बढ़ता है।
सूखी जमीन भी इस स्थिति को और गंभीर बना रही है। मिट्टी में नमी कम होने के कारण सूर्य की अधिकांश ऊर्जा सीधे हवा को गर्म करने में खर्च हो रही है।
कब घोषित होती है हीटवेव?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाए और सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री अधिक हो, या फिर तापमान सीधे 45 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच जाए, तो उसे हीटवेव की श्रेणी में रखा जाता है।
मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में तापमान आसानी से इस सीमा को पार कर सकता है।
कब मिलेगी राहत?
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 13 जून के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। भूमध्यसागर क्षेत्र से आने वाला यह मौसम तंत्र बादल, हल्की बारिश और हवा की दिशा में बदलाव लेकर आएगा, जिससे तापमान में कुछ डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
हालांकि, दक्षिण-पश्चिम मानसून अभी उत्तर भारत से काफी दूर है। मानसून 4 जून को केरल पहुंच चुका है, लेकिन उसके उत्तर भारत तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। ऐसे में अगले कुछ सप्ताह तक इस तरह के छोटे लेकिन तीव्र गर्मी के दौर देखने को मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और लू से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
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