कनिमोझी करुणानिधि ने पत्र में लिखा है, “भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) के तहत आने वाले एक स्वायत्त संस्थान, ‘नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ पर्सन्स विद मल्टीपल डिसेबिलिटीज’ (एनआईईपीएमडी) चेन्नई में काम कर रहे 120 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट फैकल्टी और स्टाफ की अचानक और मनमाने ढंग से नौकरी खत्म किए जाने के मामले में आपके दखल की आवश्यकता है। इस संस्थान में 588 छात्रों के लिए दिव्यांगता से जुड़े लगभग 13 प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। कुल फैकल्टी में से केवल 20 प्रतिशत ही स्थायी और 80 प्रतिशत कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी हैं।”
पत्र में आगे लिखा, “जिन कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को हटाया गया, उन्हें 2024 में सही प्रक्रिया के तहत नियुक्त किया गया था। इसके लिए एक अधिकृत सिलेक्शन कमेटी ने जांच-पड़ताल, परीक्षा, स्किल असेसमेंट और इंटरव्यू जैसी उचित चयन प्रक्रियाएं पूरी की थीं। नियुक्ति के आदेश 2027 तक के स्वीकृत कॉन्ट्रैक्ट कार्यकाल के साथ जारी किए गए थे। तब से ये कर्मचारी अपनी-अपनी भूमिकाओं में लगातार और समर्पित भाव से सेवा दे रहे हैं।
कनिमोझी ने कहा कि इस अचानक बर्खास्तगी से सेवाओं के जारी रहने, एकेडमिक स्थिरता और लाभार्थियों के कल्याण को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। इससे चल रही ट्रेनिंग, थेरेपी, रिहैबिलिटेशन सेवाओं और सपोर्ट सिस्टम पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।
कनिमोझी ने केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार से अनुरोध किया है कि कर्मचारियों को हटाने या सेवा समाप्त करने की चल रही प्रक्रिया को तुरंत रोकने का निर्देश दें और मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को 2027 तक उनके स्वीकृत कार्यकाल के पूरा होने तक काम जारी रखने की अनुमति दें।
