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Wednesday, July 22, 2026
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भारत-ऑस्ट्रेलिया लौटाएंगे ऐतिहासिक धरोहर, पूर्वजों के अवशेष भी सौंपेंगे​!

भारत सरकार ने इन अवशेषों को स्वेच्छा और बिना किसी शर्त के ऑस्ट्रेलिया को लौटाने पर सहमति जताई है।

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की घोषणा की।

ऑस्ट्रेलियाई पीएमओ की ओर से जारी बयान में द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम देते एमओयू का जिक्र है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने चेन्नई स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम में संरक्षित ऑस्ट्रेलिया के फर्स्ट नेशंस (आदिवासी समुदाय) के एक पूर्वज के अवशेषों को उनके पारंपरिक संरक्षकों को वापस सौंपने की प्रक्रिया में हुई प्रगति का स्वागत किया। भारत सरकार ने इन अवशेषों को स्वेच्छा और बिना किसी शर्त के ऑस्ट्रेलिया को लौटाने पर सहमति जताई है।

ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने कहा, “फर्स्ट नेशंस समुदायों के पूर्वजों की उनके पारंपरिक समुदायों में वापसी उनके लिए अत्यंत सम्मानजनक और भावनात्मक महत्व रखती है। इसे ऐतिहासिक न्याय और मेल-मिलाप की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत का यह निर्णय दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और आपसी विश्वास का प्रतीक है।”

इसके साथ ही प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने यह भी घोषणा की कि ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया और आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के संग्रह में मौजूद भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई महत्वपूर्ण कलात्मक और ऐतिहासिक अवशेष भी स्वेच्छा से भारत को लौटाए जाएंगे।

ऑस्ट्रेलिया के कला मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि पूर्वजों की वापसी और सांस्कृतिक महत्व की वस्तुओं का आदान-प्रदान भारत और ऑस्ट्रेलिया के साझा मूल्यों और आपसी सम्मान का प्रतीक है।

वहीं, स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाई मामलों की मंत्री मलांडिरी मैक्कार्थी ने कहा कि विदेशों से पूर्वजों की वापसी अतीत की गलतियों को सुधारने और ऐतिहासिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस प्रक्रिया में भारत के सहयोग का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों के लिए एक सकारात्मक उपलब्धि बताया।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि इन सांस्कृतिक वस्तुओं की वापसी नैतिक संग्रह और संग्रहालय प्रबंधन के सर्वोत्तम मानकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह कदम सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के सम्मान की दिशा में दोनों देशों के साझा मूल्यों को भी मजबूत करता है।

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा, ” भारत और ऑस्ट्रेलिया का साझा इतिहास दोनों देशों के लोगों को जोड़ता है और सांस्कृतिक सहयोग इन संबंधों को और गहरा बना रहा है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस निर्णय की सराहना की, जिसके तहत ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस समुदाय के पूर्वजों के अवशेष उनके पारंपरिक संरक्षकों को लौटाए जाएंगे। 

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