जयंती विशेष: समाज सुधार की मशाल थामे कलम के सिपाही आगरकर!
जब समाज परंपराओं की बेड़ियों में जकड़ा था और बोलने भर को क्रांति माना जाता था, तभी एक युवक ने न सिर्फ सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी, बल्कि उन पर सवाल उठाकर एक पूरी पीढ़ी को सोचने की नई दिशा दी। वह समाज सुधारक, कलम का सिपाही और विचारों का योद्धा था, जो कुरीतियों से … Continue reading जयंती विशेष: समाज सुधार की मशाल थामे कलम के सिपाही आगरकर!
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