भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसके 150 से अधिक नेता सोवियत रूस के एजेंट के रूप में काम करते थे और कांग्रेस को रूस से फंडिंग मिलती थी। उन्होंने इस दावे के समर्थन में अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसे उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर साझा किया।
निशिकांत दुबे ने लिखा,”कांग्रेस के बड़े नेता एचकेएल भगत के नेतृत्व में 150 से ज्यादा सांसद सोवियत रूस के पैसे पर पलते थे। रूस के एजेंट के तौर पर काम करते थे?”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस दौर की भारतीय मीडिया का एक बड़ा हिस्सा भी सोवियत प्रभाव में था। दुबे के मुताबिक, “करीब 16,000 से ज्यादा आर्टिकल रूस की ओर से भारत में छपवाए गए थे।” उन्होंने कहा कि उस समय रूस की जासूसी एजेंसी के 1,100 एजेंट भारत में सक्रिय थे, जो नौकरशाही, व्यापारी संगठन, कम्युनिस्ट पार्टियों और ओपिनियन मेकर को अपने कब्जे में रखते थे और भारत की नीतियों को प्रभावित करते थे।
भाजपा सांसद ने कांग्रेस नेता सुभद्रा जोशी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में जर्मन सरकार से पांच लाख रुपये लिए थे और चुनाव हारने के बाद इंडो-जर्मन फोरम की अध्यक्ष बन गईं। दुबे ने तंज कसते हुए पूछा,
“यह देश था या गुलामों, दलालों और बिचौलियों की कठपुतली? कांग्रेस को जवाब देना चाहिए। क्या इस पर आज जांच होनी चाहिए या नहीं?”
कांग्रेस,करप्सन और ग़ुलामी
1. यह अवर्गीकृत गुप्त दस्तावेज CIA का 2011 में जारी हुआ
2. इसके अनुसार स्वर्गीय कांग्रेस के बड़े नेता HKL भगत के नेतृत्व में 150 से ज़्यादा कॉंग्रेस के सांसद सोवियत रुस के पैसे पर पलते थे,रुस के लिए दलाली करते थे?
3. पत्रकारों के समूह उनके दलाल थे तथा… pic.twitter.com/ozKx9nPUCe— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) June 30, 2025
भाजपा सांसद द्वारा साझा की गई 2011 की सीआईए रिपोर्ट के अनुसार, सोवियत संघ ने भारत में कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों को गुप्त रूप से फंडिंग दी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोवियत संघ ने न केवल कांग्रेस, बल्कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) को भी आर्थिक सहायता दी थी।
सीआईए दस्तावेज के अनुसार, उस समय सोवियत संघ भारत में राजनयिक, पत्रकारिता, व्यापार और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी बेहद सक्रिय था। हर साल करीब 10,000 पर्यटक और 1,100 तकनीकी विशेषज्ञ भारत आते थे, जिनका मकसद राजनीतिक और वैचारिक प्रभाव स्थापित करना था।
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस की तरफ से इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतंत्र के साथ छेड़छाड़ का प्रमाण है, जिसकी संसद और देश को जवाबदेही मांगनी चाहिए।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन भाजपा सांसद के आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है—क्या अतीत के गुप्त विदेशी हस्तक्षेप पर आज जांच होनी चाहिए?
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