बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने एक बड़ी याचिका दाखिल कर दावा किया है कि भारत में फिलहाल लगभग 5 करोड़ घुसपैठिए रह रहे हैं। उपाध्याय ने मांग की है कि पूरे देश में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराया जाए और इस विषय पर जल्द सुनवाई की जाए।
आईएएनएस से बातचीत में अश्विनी उपाध्याय ने कहा, “मैंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है कि हर राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण हो। अभी देश में लगभग 5 करोड़ घुसपैठिए रह रहे हैं, जिनमें पाकिस्तानी, अफगानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या शामिल हैं।”
उन्होंने विशेष रूप से बिहार का ज़िक्र करते हुए कहा कि सीमांचल क्षेत्र में जनसांख्यिकीय बदलाव साफ़ दिखाई दे रहा है। “ऐसी कोई विधानसभा सीट नहीं बची जहां वोटर लिस्ट में घुसपैठियों के नाम न हों। बिहार चुनाव में हजार-दो हजार वोट से हार-जीत तय होती है, ऐसे में यदि एक सीट पर 10 हजार घुसपैठिए वोट करें, तो पूरी चुनावी तस्वीर बदल जाएगी।”
उपाध्याय ने बताया कि इस याचिका में उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और चुनाव आयोग — सभी को पार्टी बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील को संज्ञान में लेते हुए 10 जुलाई को सुनवाई के लिए तैयार कर लिया है।
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल कराने में मदद कर रहे हैं, उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) और गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) जैसे कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। “जब तक ऐसे तत्वों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक घुसपैठिए इसी तरह फर्जी तरीके से भारतीय मतदाता बनते रहेंगे,” उपाध्याय ने कहा।
बता दें कि बिहार में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिसे विपक्ष पहले ही एनआरसी जैसी कवायद करार दे चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी हलचल और तेज होने की संभावना है।
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