केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले के सीज गांव में स्थित विश्वप्रसिद्ध लीविंग रूट ब्रिज का दौरा कर वहां की जैविक विरासत, स्थानीय परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे उदाहरण की सराहना की। उन्होंने इस जीवित पुल को सस्टेनेबल डेवलपमेंट और प्राकृतिक संतुलन की मिसाल बताते हुए कहा कि “ऐसे समय में जब पूरी दुनिया टिकाऊ समाधान तलाश रही है, सीज गांव के लोगों ने दिखाया है कि पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति-समन्वयित प्रयासों से क्या कुछ संभव है।”
सीतारमण ने अपने दौरे के दौरान गांव के बुजुर्गों, पारंपरिक समुदायों और पेमेंट फॉर इकोसिस्टम सर्विसेज प्रोग्राम के लाभार्थियों से मुलाकात की। यह कार्यक्रम विश्व बैंक, केएफडब्ल्यू और एशियाई विकास बैंक (ADB) द्वारा समर्थित है और स्थानीय लोगों को उनकी पारिस्थितिक सेवाओं के लिए प्रोत्साहित करता है।
वित्त मंत्री ने लीविंग रूट ब्रिज की अद्भुत संरचना पर बात करते हुए कहा, “यह पुल दिखाता है कि कैसे पीढ़ियों से चली आ रही स्वदेशी ज्ञान प्रणाली आज के समय में भी प्रासंगिक है और पूरे विश्व के लिए समाधान बन सकती है।” उन्होंने इन पुलों के निर्माण और रखरखाव में स्थानीय समुदायों की भूमिका को सराहते हुए कहा कि यह प्रकृति के साथ मानव के सामंजस्य का जीवंत उदाहरण है।
सीतारमण ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इस सांस्कृतिक और पारिस्थितिक धरोहर का दस्तावेजीकरण होना चाहिए और उसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह मान्यता दिखावे के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को यह दिखाने के लिए है कि आपने यह काम बहुत पहले कर लिया था। आपके प्रयास न केवल प्रभावी हैं, बल्कि वे दोहराए भी जा सकते हैं।”
सीतारमण ने गांव के उन बुजुर्गों का भी आभार जताया, जिन्होंने वर्षों तक इन जीवित पुलों की देखरेख की और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह अनमोल धरोहर सहेज कर रखी। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “LiFE – Lifestyle for Environment” के दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। “मेघालय के लोग पहले से ही उस जीवनशैली को अपनाए हुए हैं, जिसकी आज दुनिया को आवश्यकता है।”
अपने दौरे के दूसरे चरण में, वित्त मंत्री वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत ईस्ट खासी हिल्स के सीमावर्ती गांव सोहबर भी पहुंचीं। उन्होंने इस क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विकास की घोषणा करते हुए कहा कि “सोहबर जैसे सीमावर्ती गांव भारत की सीमाएं नहीं, बल्कि देश की आंखें और कान हैं। इन्हें प्राथमिकता के साथ विकास की मुख्यधारा में लाना हमारी जिम्मेदारी है।”
सीतारमण ने सोहबर में विकास के चार प्रमुख क्षेत्रों की घोषणा की:
- बेहतर सड़कें
- डिजिटल और टेलीकॉम कनेक्टिविटी
- टीवी कवरेज
- बिजली की पहुंच
उन्होंने बताया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का दूसरा चरण अब पूर्वोत्तर और सीमावर्ती राज्यों तक विस्तारित हो रहा है, जिसमें मेघालय की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। वित्त मंत्री का यह दौरा न केवल एक सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संपदा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में संतुलित विकास और आत्मनिर्भरता की ओर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है।
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