आम आदमी पार्टी (AAP) ने शुक्रवार(18 जुलाई) को औपचारिक रूप से विपक्षी INDI अलायंस से अलग होने का ऐलान कर दिया। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब महज एक दिन बाद INDI अलायंसकी बैठक प्रस्तावित है और संसद का मानसून सत्र भी कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है। AAP ने अपने इस कदम के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया है और उस पर 2024 लोकसभा चुनावों के बाद विपक्ष को संगठित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
दिल्ली स्थित अपने आवास से यह घोषणा करते हुए राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा, “AAP अब INDI अलायंस का हिस्सा नहीं है। हम संसद में जनहित के मुद्दे उठाते रहेंगे और सरकार का विरोध तब करेंगे जब वह गलत हो।” उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव समेत अब सभी चुनाव AAP अकेले लड़ेगी। संजय सिंह ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा, “INDI अलायंस ने 2024 लोकसभा चुनावों के बाद कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई, न ही कोई बैठक बुलाई। जो दल गठबंधन में सबसे बड़ा है यानी कांग्रेस क्या उसने सभी दलों को एकजुट रखने की जिम्मेदारी निभाई?”
AAP और कांग्रेस के बीच पहले कुछ राज्यों जैसे दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, गोवा और चंडीगढ़ में सीमित तालमेल देखने को मिला था, लेकिन दोनों के संबंध पूरे चुनाव अभियान के दौरान तनावपूर्ण रहे। 2025 की दिल्ली विधानसभा चुनावों में दोनों दल अलग-अलग मैदान में उतरे और एक-दूसरे पर तीखे हमले किए।
हालांकि, संजय सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि AAP संसद में बीजेपी के खिलाफ मुखर विपक्ष की भूमिका निभाती रहेगी।
“हमने हमेशा एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई है और आगे भी निभाते रहेंगे,” उन्होंने कहा। AAP की इस घोषणा पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, “AAP का बाहर जाना गठबंधन को और स्पष्ट तथा मजबूत बनाएगा। AAP शुरू से ही दोहरा खेल खेल रही थी।”
उन्होंने कहा, “राहुल गांधी आज भारत के संविधान, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के संघर्ष में एक स्पष्ट और विश्वसनीय चेहरा बनकर उभरे हैं। वहीं, AAP बार-बार कांग्रेस पर ही हमला करती रही और बीजेपी को चुनौती देने के बजाय विपक्ष को कमजोर करती रही।” बाजवा ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल खुद कांग्रेस कार्यकर्ताओं से AAP में शामिल होने की अपील कर चुके हैं, जो उनकी मंशा को साफ दर्शाता है।
AAP के बाहर होने के बाद INDI अलायंस के लिए यह एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। जहां एक ओर AAP ने कांग्रेस को निष्क्रिय नेतृत्व के लिए जिम्मेदार ठहराया, वहीं कांग्रेस ने AAP पर अवसरवाद और विपक्ष को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी दलों का यह मोर्चा भविष्य की राजनीति में किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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