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बेंगलुरु में रहकर अल-कायदा की विचारधारा फैला रही थी झारखंड की शमा परवीन!

गुजरात ATS ने किया गिरफ्तार

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आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े जहरीले प्रचार को सोशल मीडिया पर फैलाने के आरोप में गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने बेंगलुरु में रहने वाली 30 वर्षीय शमा परवीन अंसारी को गिरफ्तार किया है। मूल रूप से झारखंड की रहने वाली शमा परवीन पिछले तीन वर्षों से कर्नाटक की राजधानी में एक किराए के फ्लैट में रह रही थी और सोशल मीडिया पर जिहादी विचारधारा का प्रचार कर रही थी। ATS के मुताबिक, शमा दो फेसबुक पेज और एक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से प्रेरित कट्टरपंथी विचारधारा, भड़काऊ भाषण और भारत विरोधी प्रचार साझा कर रही थी। उसके सोशल मीडिया फॉलोअर्स की संख्या 10,000 से ज्यादा बताई जा रही है।

एक ATS अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “वो हथियार नहीं चला रही थी, लेकिन नैरेटिव चला रही थी — और आज के दौर में ये उतना ही खतरनाक है।” प्रारंभिक जांच में पता चला है कि वह सिर्फ कंटेंट को फॉरवर्ड नहीं कर रही थी, बल्कि सक्रिय रूप से प्रचार का हिस्सा थी। वह भारत सरकार के खिलाफ “सशस्त्र क्रांति” और “जिहाद” की अपीलों को बढ़ावा दे रही थी।

यह मामला तब सामने आया जब 10 जून को गुजरात ATS के DSP हर्ष उपाध्याय को पांच इंस्टाग्राम अकाउंट्स के जरिए अल-कायदा का प्रचार करने की जानकारी मिली। इन अकाउंट्स से गजवा-ए-हिंद, ‘काफिरों’ के खिलाफ हिंसा, और पाकिस्तान के लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल अज़ीज़ जैसे कट्टरपंथियों के वीडियो साझा किए जा रहे थे। इसके बाद ATS ने एक मल्टी-स्टेट ऑपरेशन में अहमदाबाद, मोडासा, दिल्ली और नोएडा से चार अन्य लोगों—फारदीन शेख, सैफुल्ला कुरैशी, मोहम्मद फैक और ज़ीशान अली को गिरफ्तार किया।

पूछताछ में फैक ने बताया कि प्रचार सामग्री के कुछ स्रोत शमा परवीन अंसारी के फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट्स से जुड़े थे। इस सूचना पर ATS ने केंद्रीय एजेंसियों और बेंगलुरु पुलिस की मदद से आरटी नगर के मणोरायणपाल्या इलाके में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया।

ATS को शक है कि शमा किसी संगठित ऑनलाइन आतंकी नैरेटिव इकोसिस्टम का हिस्सा थी, जो AQIS की विचारधारा को युवाओं तक पहुंचाने का काम कर रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि शमा उन चार गिरफ्तार आरोपियों में से एक मोहम्मद फैक से डिजिटल रूप से जुड़ी हुई थी। हालांकि, शुरुआती जांच यह भी संकेत देती है कि इन कट्टरपंथियों का AQIS के सीधे संपर्क में आए बिना ही ऑनलाइन तरीके से ब्रेनवॉश किया गया हो सकता है।

शमा परवीन की कोई नियमित नौकरी नहीं थी। वह अपने छोटे भाई के साथ बेंगलुरु में रह रही थी। बाहर से बेहद शांत और साधारण दिखने वाली यह महिला सोशल मीडिया पर उग्र इस्लामी प्रचार की एक गुप्त संचालिका थी। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात लाया गया है, जहां उससे पूछताछ की जा रही है कि उसके कंटेंट का प्रभाव कितना व्यापक था और क्या वह किसी बड़े आतंकी स्लीपर सेल का हिस्सा थी।

ATS अब शमा की डिजिटल गतिविधियों, उसके फॉलोअर्स के प्रोफाइल और विदेशी अकाउंट्स से उसके संपर्कों की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क में पाकिस्तान स्थित इंस्टाग्राम अकाउंट्स जैसे “gujjar_sab.111” और “M Salauddin Siddiqui 1360” भी सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो भारत सरकार को निशाना बनाने वाले कंटेंट को प्रसारित करते हैं।

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