गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल पत्तन प्राधिकरण (डीपीए) में बुधवार (30 जुलाई)को केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने देश में निर्मित पहले 1 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन पावर प्लांट का उद्घाटन किया। यह पावर प्लांट पूरी तरह भारतीय इंजीनियरों द्वारा विकसित किया गया है और सालाना लगभग 140 मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में सक्षम है। इसका उद्देश्य बंदरगाह संचालन को पर्यावरण के अनुकूल बनाना और समुद्री डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने इस परियोजना को “भविष्य के लिए तैयार पूर्णतः आत्मनिर्भर हाइड्रोजन इकोसिस्टम” की संज्ञा दी और कहा कि यह देश के अन्य बंदरगाहों को हरित तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने डीपीए द्वारा पहले ही तैनात किए गए भारत के पहले मेड-इन-इंडिया ऑल इलेक्ट्रिक ग्रीन टग का उदाहरण देते हुए बंदरगाह की हरित पहलों की सराहना की।
सोनोवाल ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के हरित परिवर्तन का प्रतीक बताया और कहा कि यह भारत की नेट जीरो उत्सर्जन की दिशा में दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि “डीपीए ने मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत निर्धारित दृष्टिकोण को यथार्थ में बदलने का काम किया है।”
गौरतलब है कि 26 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने भुज यात्रा के दौरान एक 10 मेगावाट क्षमता के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट की आधारशिला रखी थी। उस बड़ी परियोजना के हिस्से के रूप में, महज चार महीनों में 1 मेगावाट के इस मॉड्यूल का संचालन शुरू होना भारत के ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को गति देने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री ठाकुर, मंत्रालय के सचिव टी.के. रामचंद्रन, डीपीए अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह और एलएंडटी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने डीपीए की टीम और एलएंडटी के इंजीनियरों की गति और सटीकता की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि यह परियोजना तकनीकी क्षमता और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है।
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