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संविधान संशोधन पर दुबे का वार, कहा 1976 में राष्ट्रपति पंगु!

इसके बाद 1976 में हुए संशोधनों में राष्ट्रपति की शक्तियां लगभग खत्म कर दी गईं और उन्हें प्रधानमंत्री का आदेश मानने के लिए बाध्य कर दिया गया।

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लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पर चल रही बहस के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को घेरते हुए आप Emergency काल का इतिहास याद दिलाया। उन्होंने कहा कि 1975 में 39वें संशोधन के जरिए इंदिरा गांधी ने ऐसा प्रावधान कर दिया था कि प्रधानमंत्री के खिलाफ किसी भी अपराध में कार्रवाई नहीं की जा सके।

इसके बाद 1976 में हुए संशोधनों में राष्ट्रपति की शक्तियां लगभग खत्म कर दी गईं और उन्हें प्रधानमंत्री का आदेश मानने के लिए बाध्य कर दिया गया।

दुबे ने कहा कि यह विषय चर्चा का हिस्सा होना चाहिए और इतिहास को छात्रों को पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि लोकसभा में विधेयक की कॉपियां फाड़ना और उछालना केवल अराजकता फैलाने जैसा है।

मीडिया से बातचीत में दुबे ने सवाल उठाया कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल चले जाएं तो क्या उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा नेताओं ने आरोप लगने पर पद छोड़ा।

अमित शाह ने गुजरात के गृह मंत्री रहते हुए जेल जाने से पहले इस्तीफा दिया था। उमा भारती ने भी मुख्यमंत्री पद छोड़ा था। इसी तरह लालकृष्ण आडवाणी और मदन लाल खुराना ने भी आरोप लगने के बाद पद त्याग दिया था।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज अरविंद केजरीवाल जेल में रहते हुए भी मुख्यमंत्री बने हुए हैं। अगर संविधान में स्पष्टता नहीं है, तो नया संशोधन करने में दिक्कत क्या है? दुबे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी केवल ट्वीट और ट्यूशन की राजनीति कर रहे हैं।

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