जापानी शोधकर्ताओं ने हाल ही में स्टेम सेल आधारित नए अध्ययन में दो अलग-अलग कोशिका लाइनेज की पहचान की है, जो दांत की जड़ और उसके आसपास की हड्डियों (एल्वियोलर बोन) के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं। यह खोज दंत चिकित्सा में रीजेनरेटिव थेरपी के क्षेत्र में बड़ी संभावनाओं का संकेत देती है।
टोक्यो स्थित द इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की टीम ने “डेवलपिंग टीथ” यानी निकलते हुए दांत में स्टेम कोशिकाओं के प्रभाव को समझने के लिए जेनेटिकली मॉडिफाइड चूहों पर प्रयोग किए। इसमें लाइनेज ट्रेसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे दांत विकास में शामिल कोशिकाओं की यात्रा का पता लगाया जा सके।
संस्थान के पीरियोडोंटोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर मिज़ुकी नागाटा ने कहा, “हमारे निष्कर्ष दांतों की जड़ निर्माण प्रक्रिया के लिए एक यांत्रिक ढांचा प्रदान करते हैं और डेंटल पल्प, पीरियोडोंटल ऊतक और हड्डियों के लिए नवीन स्टेम-सेल-बेस्ड रीजेनेरेटिव उपचार का मार्ग प्रशस्त करते हैं।”
दशकों से खोए हुए दांतों को बदलने के लिए दंत प्रत्यारोपण या डेंचर जैसी बाहरी तकनीकों का इस्तेमाल होता रहा है। हालांकि ये उपाय प्रभावी हैं, लेकिन प्राकृतिक दांत की कार्यक्षमता और बनावट को पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर पाते।
नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने जेनेटिकली मॉडिफाइड चूहों में दांतों की विकास यात्रा को ट्रैक किया। इस प्रक्रिया में एक अज्ञात मेसेनकाइमल मूल कोशिका समूह और दो अलग लाइनेज की पहचान हुई। पहला लाइनेज एपिथीलियल रूट शीथ में स्थित पैपिला कोशिकाओं से उत्पन्न होता है, जो सीएक्ससीएल12 प्रोटीन को अभिव्यक्त करती हैं। यह प्रोटीन अस्थि निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कैनोनिकल डब्ल्यूएनटी पाथवे के माध्यम से, ये कोशिकाएं दांत बनाने वाले ओडोन्टोब्लास्ट, सीमेंटोब्लास्ट और रीजेनरेटिव परिस्थितियों में एल्वियोलर बोन बनाने वाले ऑस्टियोब्लास्ट में बंट सकती हैं। दूसरा लाइनेज डेंटल फोलिकल पर केंद्रित है, जो बढ़ते दांतों को ढकती है और आसपास के ऊतक निर्माण में योगदान देती है। इसमें पीटीएचआरपी कोशिकाएं सीमेंटोब्लास्ट, लिगामेंट फाइब्रोब्लास्ट और एल्वियोलर बोन-फॉर्मिंग ऑस्टियोब्लास्ट में विकसित हो सकती हैं।
शोध टीम के अनुसार, ये निष्कर्ष दांत और एल्वियोलर अस्थि के विकास की समझ को नई दिशा देते हैं और इनके जटिल विकास तंत्र पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं। यह खोज भविष्य में खोए हुए दांतों और उनके आसपास की हड्डियों को पुनर्जीवित करने वाले उपचारों की राह खोल सकती है।
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