आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आखिरकार दिल्ली के 95 लोधी एस्टेट में एक सरकारी बंगला आवंटित कर दिया गया है। यह फैसला महीनों चली कानूनी जंग और दिल्ली हाईकोर्ट के कई हस्तक्षेपों के बाद दिया गया।
दरअसल केजरीवाल और केंद्र सरकार के बीच यह विवाद उनके सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद शुरू हुआ , जब उन्होंने 6, फ्लैगस्टाफ मार्ग वाला सरकारी आवास खाली कर दिया। दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्रियों को स्थायी सरकारी आवास देने का कोई प्रावधान नहीं है, जिसके चलते AAP ने अपने राष्ट्रीय संयोजक के लिए वैकल्पिक आवास की मांग की।
वहीं आप आदमी पार्टी ने दलील दी कि एक राष्ट्रीय पार्टी के प्रमुख के तौर पर केजरीवाल को टाइप 8 श्रेणी का बंगला मिलना चाहिए। हालांकि, अदालत के हस्तक्षेप के बाद अंततः टाइप 7 बंगला आवंटित किया गया।
केंद्र सरकार की एजेंसियों MoHUA और CPWD ने हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद 95 लोधी एस्टेट को उपयुक्त पाया। यह बंगला पहले भाजपा नेता और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा को आवंटित था, जिन्होंने पंजाब से चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए। इस बंगले में चार बेडरूम, एक हॉल, वेटिंग रूम, और डाइनिंग एरिया है। इसमें दो लॉन हैं, जिनमें से एक छोटा है। परिसर में कैंप ऑफिस के लिए दो कमरे हैं और वहीं वर्षों से काम कर रहे स्टाफ के लिए क्वार्टर भी मौजूद हैं।
जानकारी के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल और उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने सोमवार(6 अक्तूबर) को इस बंगले का दौरा किया और संभवतः वे रिनोवेशन पूरा होने के बाद वहां शिफ्ट होंगे। यह आवंटन उस समय हुआ है जब दिल्ली के ‘शीशमहल’ विवाद की यादें अब भी ताज़ा हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए केजरीवाल पर आरोप लगे थे कि उन्होंने सरकारी पैसे से अपने आधिकारिक आवास पर अत्यधिक खर्च किया।
भाजपा ने उस दौरान आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी, जो सादगी की राजनीति का दावा करती है, उसने सत्ता में आने के बाद भव्य रेनोवेशन कराकर अपनी “ईमानदार राजनीति” की छवि को खुद धूमिल किया है। अब जबकि केजरीवाल को नया बंगला मिला है, विपक्षी दलों से हमले फिर तेज हो सकते हैं। हालांकि, AAP इसे सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन दिखाना चाहती है और पार्टी प्रमुख को उनकी संवैधानिक स्थिति के अनुरूप सुविधा दी गई है।
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