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Tuesday, February 3, 2026
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टाटा समूह में अंदरूनी उठापटक: सरकार ने नेतृत्व से कहा जल्द बहाल करें स्थिरता!

कहा जा रहा है की डेरियस खंबाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर, प्रमीत झावेरी और मेहली मिस्‍त्री ने टाटा सन्स के बोर्ड संचालन में हस्तक्षेप करते हुए बोर्ड मीटिंग के मिनट्स की समीक्षा और स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति पर प्रभाव डालने की कोशिश की।

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टाटा समूह में अंदरूनी मतभेदों के बीच केंद्र सरकार ने शीर्ष नेतृत्व को सख्त संदेश देते हुए संगठन में स्थिरता बहाल करने के निर्देश दिए हैं। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा से मुलाकात कर कहा कि, “किसी भी हाल में समूह में स्थिरता और अनुशासन बनाए रखा जाए।”

सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक लगभग एक घंटे चली, जिसमें सरकार ने साफ संकेत दिया कि ट्रस्ट्स में जारी मतभेद टाटा सन्स की कार्यप्रणाली को प्रभावित नहीं करने चाहिए। केंद्र ने यह भी सुझाव दिया कि यदि कोई ट्रस्टी समूह की स्थिरता में बाधा डाल रहा है, तो उसके खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएं। मंत्रियों ने यह भी याद दिलाया कि टाटा ट्रस्ट्स की बहुमत हिस्सेदारी के साथ एक “सार्वजनिक जिम्मेदारी” भी जुड़ी है, क्योंकि यह देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक है।

बैठक में नियामकीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की उस शर्त का उल्लेख किया गया जिसके तहत ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), जिनमें टाटा सन्स भी शामिल है, को सूचीबद्ध होना अनिवार्य है। साथ ही, शापूरजी पालोनजी समूह, जो टाटा सन्स का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है उसके  लिए तरलता समाधान पर भी विचार किया गया।

बैठक के बाद चारों टाटा प्रतिनिधियों ने आपस में संक्षिप्त चर्चा की और फिर मुंबई लौट गए। वे 9 अक्टूबर को दिवंगत रतन टाटा की पहली पुण्यतिथि पर आयोजित दो दिवसीय स्मरण समारोह में भाग लेंगे।

CNBC-TV18 से जुड़े सूत्रों ने कहा कि सरकार “टाटा ट्रस्ट्स के चार ट्रस्टीज़ द्वारा किए जा रहे सत्ता परिवर्तन के प्रयास की मूक दर्शक नहीं रह सकती।” कहा जा रहा है की डेरियस खंबाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर, प्रमीत झावेरी और मेहली मिस्‍त्री ने टाटा सन्स के बोर्ड संचालन में हस्तक्षेप करते हुए बोर्ड मीटिंग के मिनट्स की समीक्षा और स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति पर प्रभाव डालने की कोशिश की। इन कदमों ने समूह में “कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी गंभीर चिंताएं” पैदा की हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद से टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद गहराते गए हैं। डोराबजी टाटा ट्रस्ट के चार ट्रस्टी एक ओर हैं, जबकि नोएल टाटा समेत तीन अन्य दूसरी ओर दिखाई दे रहे हैं।

विवादों के बीच मंगलवार (7 अक्टूबर) सुबह टाटा समूह की कई कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। टाइटन कंपनी के शेयर करीब 4% बढ़कर ₹3,552.80 पर पहुंचे, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर लगभग 2% बढ़कर ₹3,025 पर ट्रेड हुए। कंपनी ने 9 अक्टूबर को होने वाली अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द कर दी है, जो रतन टाटा की पुण्यतिथि के दिन निर्धारित थी, हालांकि एनालिस्ट कॉल तय समय पर होगी। टाटा स्टील 0.4% बढ़कर ₹172.14 पर, ट्रेंट 0.5% बढ़कर ₹4,709 पर, और टाटा टेक्नोलॉजीज़ 0.5% बढ़कर ₹716.50 पर रही। वहीं टाटा मोटर्स 0.34% गिरकर ₹695.65 पर बंद हुई।

सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह टाटा समूह की स्थिरता और साख पर कोई आंच नहीं आने देगी। नेतृत्व से अपेक्षा की गई है कि आंतरिक विवादों को सार्वजनिक विवाद में बदलने के बजाय संयम और विवेक से हल किया जाए।

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