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दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच फिलीपींस और कनाडा ने किया रक्षा समझौता!

चीन के दबदबे को चुनौती देने की तैयारी

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फिलीपींस और कनाडा ने रविवार (2 नवंबर)को एक ‘विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट’ (Visiting Forces Agreement – VFA) पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह समझौता कनाडाई सैनिकों को फिलीपींस की सेना के साथ संयुक्त थल-आधारित सैन्य अभ्यासों में भाग लेने की अनुमति देगा। इससे पहले कनाडा की भूमिका मुख्य रूप से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और फिलीपींस के साथ समुद्री गश्त अभियानों तक सीमित थी।

कनाडा के रक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी (David McGuinty) ने इस समझौते को ओटावा की इंडो-पैसिफिक रणनीति में एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया। मनीला में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, “हम प्रशिक्षण, सैन्य आदान-प्रदान, सूचना साझाकरण और साइबर सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने जा रहे हैं।” मैकगिन्टी ने यह भी घोषणा की कि कनाडा अगले वर्ष वसंत ऋतु में आयोजित होने वाले फिलीपींस के वार्षिक ‘बालिकातान’ (Balikatan) सैन्य अभ्यास में भाग लेना चाहता है।

फिलीपींस अमेरिका का एक दीर्घकालिक संधि सहयोगी है, जिसने इस वर्ष की शुरुआत में न्यूजीलैंड के साथ भी रक्षा समझौता किया था। इसके अलावा देश के पास पहले से ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ VFA समझौते मौजूद हैं। फ्रांस के साथ एक समान रक्षा समझौते पर बातचीत जारी है।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण चीन सागर में मनीला और बीजिंग के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल के महीनों में चीनी जहाजों और फिलीपींस नौसेना के बीच कई टकराव दर्ज किए गए हैं।

चीन इस रणनीतिक जलमार्ग पर लगभग पूरे क्षेत्र पर अपना दावा जताता है, जबकि 2016 के अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण (Arbitration Tribunal) ने उसके इन दावों को अवैध करार दिया था। इसके बावजूद चीन क्षेत्र में अपने सैन्य ठिकाने और गश्त गतिविधियां बढ़ाता जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत है। अब कनाडा भी अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया-जापान गठजोड़ के साथ मिलकर दक्षिण चीन सागर में ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ रणनीति को मजबूती देने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इस कदम को न केवल सैन्य साझेदारी का विस्तार, बल्कि चीन को स्पष्ट रणनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एकतरफा दबदबा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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