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IndiaAI मिशन: AI को सुरक्षित, समावेशी और जिम्मेदारी से अपनाने के लिए दिशानिर्देश जारी!

नीति में अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक लक्ष्यों को भी रेखांकित किया गया है।

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नई दिल्ली में बुधवार (5 नवंबर) को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने IndiaAI मिशन के तहत देश में एआई (Artificial Intelligence) के सुरक्षित, समावेशी और जिम्मेदार उपयोग के लिए आधिकारिक दिशानिर्देश जारी किए। इस समारोह में देश के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अजय कुमार सूद, MeitY सचिव एस. कृष्णन और IndiaAI मिशन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह लॉन्च आगामी भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर जिम्मेदार एआई गवर्नेंस में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।

जारी किए गए दिशानिर्देश अत्याधुनिक तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए समाज, नागरिक अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक समग्र गवर्नेंस ढाँचा प्रस्तुत करते हैं। इस ढाँचे की नींव सात मार्गदर्शक सिद्धांतों (सूत्रों) पर आधारित है, जो एआई के विकास और उपयोग को मानव-केंद्रित, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाए रखने पर ज़ोर देते हैं। इन सूत्रों में विश्वास को मूल आधार माना गया है, जिसके अनुसार तकनीक, संस्थानों और उपयोगकर्ताओं—तीनों स्तरों पर भरोसा कायम रहना आवश्यक है। इसके साथ ही, जन-प्रथम दृष्टिकोण अपनाने, जिम्मेदार नवाचार को प्रोत्साहित करने, निष्पक्षता, जवाबदेही, पारदर्शिता और सुरक्षा-सततता को भी अनिवार्य तत्व के रूप में रेखांकित किया गया है।

इन दिशानिर्देशों के अंतर्गत छह प्रशासनिक स्तंभ पर आधारित सिफारिशें दी गई हैं, जिनमें बुनियादी ढांचा सुदृढ़ीकरण, क्षमता निर्माण, नीति एवं विनियमन, जोखिम न्यूनीकरण, जवाबदेही और संस्थागत ढाँचों का विस्तार शामिल है। सरकार ने स्पष्ट किया कि जहां संभव हो, मौजूदा कानूनों का उपयोग कर एआई के लिए नीति ढांचा तैयार किया जाएगा, और केवल आवश्यकता पड़ने पर ही नए कानूनी प्रावधान लागू किए जाएंगे। उदाहरणस्वरूप, आईटी अधिनियम 2000 और डिजिटल निजी डेटा सुरक्षा अधिनियम के तहत एआई अनुप्रयोगों की स्पष्ट श्रेणीकरण और जवाबदेही निर्धारण पर ज़ोर दिया गया है।

नीति में अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक लक्ष्यों को भी रेखांकित किया गया है। अल्पकालिक चरण में जोखिम मूल्यांकन ढाँचा विकसित करना, बुनियादी ढांचे की पहुँच बढ़ाना और जागरूकता अभियान शामिल हैं। मध्यम अवधि में मानकों का प्रकाशन और नियामक सैंडबॉक्स लागू होंगे, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में एआई शासन ढाँचे की समय-समय पर समीक्षा और अद्यतन सुनिश्चित किया जाएगा।

अपने संबोधन में डॉ. अजय कुमार सूद ने कहा कि पूरे ढाँचे का मूल संदेश किसी को नुकसान न पहुंचाएं होना चाहिए। वहीं MeitY सचिव एस. कृष्णन ने मानव-केंद्रित एआई विकास पर ज़ोर देते हुए कहा कि तकनीक का उद्देश्य नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को सुरक्षित और बेहतर बनाना है।

इन दिशानिर्देशों से भारत अब न केवल एआई नवाचार का विस्तार करने की दिशा में, बल्कि उसे जिम्मेदारी और सार्वजनिक विश्वास के साथ लागू करने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है।

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