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वर्ल्ड डायबिटीज डे : मां और बच्चे के लिए गर्भावस्था में मधुमेह की चुनौती, बचाव के उपाय!

गर्भावस्था के दौरान कई तरह के हार्मोनल बदलाव के साथ-साथ डायबिटीज का खतरा भी देखने को मिलता है।

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गर्भावस्था कई मायनों में एक सुखद अनुभव होता है, जिसकी चाह हर लड़की रखती है। इस दौरान महिलाओं को कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव से गुजरना पड़ता है। ऐसे में कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आती हैं, जिनमें से एक है गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज।

गर्भावस्था के दौरान कई तरह के हार्मोनल बदलाव के साथ-साथ डायबिटीज का खतरा भी देखने को मिलता है। यह न केवल मां के लिए नुकसानदेह है बल्कि होने वाले बच्चे की सेहत पर भी गहरा असर डालती है। सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गाइनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने इस दौरान होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और बचाव के उपायों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है।

उन्होंने बताया है कि गर्भावस्था में ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित होने के कारण डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है। यह आमतौर पर गर्भावस्था के छठे या सातवें महीने में देखने को मिलता है। हालांकि, अगर इसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए आगे चलकर जोखिम भरा हो सकता है।

उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज से होने वाले जोखिम के बारे में भी बात की, जिसमें उन्होंने बताया, “अगर गर्भवती महिला की उम्र 40 से ज्यादा है, परिवार में किसी बड़े को डायबिटीज है, या फिर ब्लड प्रेशर या हार्ट डिजीज की समस्या से जूझ रही है, तो ऐसी अवस्था में डायबिटीज होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है।

उन्होंने आगे बताया कि कुछ रिस्क फैक्टर पिछली प्रेग्नेंसी से भी होते हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपको पिछली प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज था, बार-बार गर्भपात हुआ, या नवजात का वजन 4 किलो से ज्यादा या फिर 2 किलो से कम था, ऐसी अवस्था में भी मां को डायबिटीज होने का रिस्क हो सकता है।

डा. पाठक ने गर्भावस्था से होने वाले लक्षणों की बात की। उन्होंने बताया, “ऐसी स्थिति में अगर आपको बार-बार प्यास लग रही है, पेशाब जाना पड़ रहा है, या फिर भूख लगती है, भूख का बढ़ना, लेकिन वजन में कमी, थकान और कमजोरी महसूस हो रही है और ये सब प्रेग्नेंसी के दौरान हो रहा है, तो डायबिटीज के चांसेस होते हैं।

उन्होंने गर्भावस्था में होने वाली दिक्कतों के बारे में बताया कि अगर प्रेगनेंसी के दौरान मां को डायबिटीज होती है, तो उनमें हाई ब्लड प्रेशर, गर्भपात और ज्यादा इंफेक्शन का जोखिम बढ़ जाते हैं। डॉ. पाठक ने डायबिटीज पर बचाव और नियंत्रण के उपाय भी बताए।

उन्होंने कहा, “डायबिटीज के दौरान नियंत्रण करना इतना मुश्किल काम भी नहीं है। आमतौर पर डायबिटीज को डाइट और एक्सरसाइज से नियंत्रण किया जा सकता है। इसके लिए उन्हें कार्बोहाइड्रेट रिच फूड के सेवन से बचना है और छोटे-छोटे मील लेना शुरू करना है।

वहीं, शुगर, हनी, जैम, फ्रूट जूस, सॉफ्ट ड्रिंक, केक और पेस्ट्री, चॉकलेट बिस्कुट, आइसक्रीम समेत चीजों से भी बचना है और प्रोटीन रिच डाइट लेनी है। ओट्स, पनीर, अंडे, स्प्राउट्स इन सबका सेवन करना है और याद रहे कि दूध नहीं लेना है।

उन्होंने यह भी बताया कि अगर हो सके तो खाना खाने के बाद जरूर टहलें।

उन्होंने कहा, “आमतौर पर डाइट और एक्सरसाइज से डायबिटीज कंट्रोल हो जाता है, लेकिन अगर नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर की परामर्श से इंसुलिन ले सकते हैं।”

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