समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आज़म ख़ान को सजा सुनाए जाने के 55 दिन बाद एक बार फिर जेल भेज दिया गया। उनके साथ बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आज़म को भी न्यायालय के आदेश पर कारागार ले जाया गया। जेल में प्रवेश करते समय आज़म ख़ान के हाथ में बिस्कुट के दो पैकेट देखे गए, जो दिनभर चर्चा का विषय बने। अंदर पहुँचने के बाद दोनों को साधारण कैदी की तरह बैरक नंबर-1 में रखा गया है, जहां उनकी दैनिक गतिविधियाँ जेल नियमों के अनुसार होंगी।
सूत्रों के मुताबिक, जेल पहुंचने के बाद रात के भोजन में दोनों को मसूर की दाल, आलू-पालक की सब्जी और रोटियां दी गईं। बताया गया कि उन्होंने बेमन से यह भोजन स्वीकार किया। जेल अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल दोनों कैदियों के लिए किसी विशेष सुविधा का प्रावधान नहीं किया गया है और वे अन्य सामान्य बंदियों की तरह ही रहेंगे।
सजा सुनाए जाने से पहले आज़म ख़ान की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत में उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए दया की अपील की थी। उन्होंने तर्क दिया कि 77 वर्षीय आज़म ख़ान हृदय रोग से ग्रस्त हैं और उनकी आँखों में भी दिक्कत है, ऐसे में देखभाल के लिए उनके बेटे अब्दुल्ला को साथ रहने की अनुमति दी जाए। इसके लिए न्यायालय में एक अलग प्रार्थना-पत्र भी दाखिल किया गया।
हालाँकि, अभियोजन पक्ष ने इस प्रार्थना पत्र पर आपत्ति जताई। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राकेश कुमार मौर्य ने बताया कि न्यायालय ने आपत्ति पर सुनवाई करते हुए जेल अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार(18 नवंबर) को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत यह तय करेगी कि दोनों को साथ रखने की अनुमति दी जाए या नहीं। फिलहाल दोनों नेता बैरक नंबर-1 में बंद हैं और जेल प्रशासन उनकी सुरक्षा व स्वास्थ्य पर निगरानी रखे हुए है।
यह भी पढ़ें:
“₹10,000 के लिए बिहार के लोग अपना वोट और बच्चों का भविष्य नहीं बेचेंगे”प्रशांत किशोर का बड़ा बयान
अपराध करने वालों को चुकानी ही होगी कीमत : सीएम योगी
कौन था माडवी हिडमा ?26 जानलेवा हमलों से जुड़ा मोस्ट-वॉन्टेड नक्सल कमांडर



