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Monday, January 12, 2026
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सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा: “बौद्धिक आतंकी ज़्यादा ख़तरनाक”

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपितों को राहत नहीं दी जानी चाहिए क्योकि इन पर दंगों की साजिश और उकसावे के गंभीर आरोप हैं।

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दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने  सुप्रीम कोर्ट में एक गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि देश में बौद्धिक स्तर पर कट्टरपंथका एक नया और खतरनाक पैटर्न उभर रहा है, जिसमें शिक्षित बुद्धिजीवी वर्ग राज्य पोषण से डॉक्टर और इंजीनियर बनने के बाद राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहा है। अदालत में यह बयान 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में आरोपित एक्टिविस्ट उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने अदालत से कहा कि जांच एजेंसियों के सामने “इंटेलेक्चुअल टेररिज़्म” की चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आ रही है। ASG ने अदालत में कहा, “जब बौद्धिक लोग आतंकवादी बनते हैं, तो वे ज़मीन पर काम करने वालों से अधिक ख़तरनाक होते हैं। ये लोग राज्य की सहायता से डॉक्टर और इंजीनियर बनते हैं और फिर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं।”

उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती है क्योंकि शिक्षित व्यक्तियों के पास तकनीकी क्षमता, संसाधन और नेटवर्क बनाने की योग्यता अधिक होती है। ASG ने हाल ही में हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आए “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” का उदाहरण दिया, जिसका संचालन कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा था। सुरक्षा एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी से जुड़े एक डॉक्टर के ठिकाने से करीब 2,900 किलोग्राम IED बनाने की सामग्री बरामद की थी। अगले दिन उसके सहयोगी डॉ. उमर नबी ने लाल किले के बाहर कार विस्फोट किया, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद कई डॉक्टरों और स्टाफ को हिरासत में लिया गया है।

यह पूरा नेटवर्क कथित तौर पर पढ़े-लिखे पेशेवरों के जरिए संचालित हो रहा था, जिससे “व्हाइट कॉलर आतंकवाद” की आशंका और गहरी हो गई है।

दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपितों को राहत नहीं दी जानी चाहिए क्योकि इन पर दंगों की साजिश और उकसावे के गंभीर आरोप हैं । ASG ने कहा कि जिन मामलों में विचारधारा का इस्तेमाल भीड़ को उकसाने, संगठित हिंसा या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया गया हो, उनमें ज़मानत के मापदंड और कठोर होने चाहिए। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद अगली तारीख पर सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया। कोर्ट ने कहा कि वह व्यापक रिकॉर्ड और केस डायरी के आधार पर ज़मानत याचिकाओं पर फैसला लेगी।

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