कर्नाटक में राजनीतिक तापमान एक बार फिर चढ़ गया है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के वफादार विधायकों का समूह दिल्ली पहुंच चुका है, जहां वे कांग्रेस हाईकमान से 2023 की उस कथित सत्ता-साझेदारी की ‘प्रतिबद्धता निभाने’ की मांग करेंगे जिसके अनुसार 2.5 साल बाद मुख्यमंत्री पद शिवकुमार को सौंपा जाना था। हालांकि, कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों ने साफ किया है कि, “कर्नाटक के मुख्यमंत्री बदले जाने पर कोई चर्चा ही नहीं हो रही है।”
गुरुवार को शिवकुमार समर्थक 10 से अधिक विधायक दिल्ली पहुंचे है, जिनमें मंत्री एन चालुरायसामी, और विधायक इक़बाल हुसैन, एचसी बालकृष्णा और एसआर श्रीनिवास शामिल हैं। मंगलवार (19 नवंबर) को ही रवि गनिगा, गुब्बी वासु, दिनेश गूलीगोवड़ा और कई अन्य विधायक दिल्ली पहुंच चुके थे। शुक्रवार को और कई विधायक अनेकल शिवन्ना, नेलमंगल श्रीनिवास, कुनीगल रंगनाथ, शिवगंगा बसवराजू और बालकृष्णा के भी पहुंचने की उम्मीद है।
इनका लक्ष्य कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात कर यह मांग उठाना है कि पार्टी 2023 में बनी पावर-शेयरिंग समझ पर अमल करे। इस बीच, मल्लिकार्जुन खड़गे आज बेंगलुरु लौट रहे हैं, जहां वह एक कार्यक्रम में शामिल होंगे और रात भी वहीं रुकेंगे। उधर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अचानक शुक्रवार-शनिवार का अपना मैसूर और चामराजनगर दौरा रद्द कर दिया और वे तुरंत बेंगलुरु लौट रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
मई 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा थी। अंततः सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। तभी से यह चर्चा चल रही है कि पार्टियों के भीतर एक ‘2.5 वर्ष का रोटेशन फॉर्मूला’ तय हुआ था, जिसके तहत डेढ़ साल बाद सत्ता परिवर्तन होना था।
कांग्रेस ने कभी इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की, लेकीनसिद्धारमैया लगातार कहते रहे हैं कि वे पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। चामराजनगर में गुरुवार(20 नवंबर) को उन्होंने दोबारा कहा, “मेरी स्थिति शुरू से मजबूत थी और आगे भी रहेगी। यह मुद्दा गैर-जरूरी बहस है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि “मंत्रिमंडल फेरबदल” की चर्चा के चलते ही यह विषय फिर उठा है, और दो खाली मंत्री पद जल्द ही भरे जाएंगे।
दिल्ली पहुंचे विधायकों की गतिविधि पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं हैं और उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। जब सिद्धारमैया के पाँच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले बयान पर उनसे सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा,“मुझे बहुत खुशी है। पार्टी ने उन्हें जिम्मेदारी दी है और हम सब मिलकर काम कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि वे जिम्मेदारी से कभी नहीं भागते और कांग्रेस नेतृत्व जब तक चाहेगा, तब तक सेवा करते रहेंगे।
बहुत से विधायक दिल्ली में एकत्र हैं, मुख्यमंत्री भी अपने कार्यक्रम छोड़कर राजधानी लौट आए हैं, और शिवकुमार समर्थक खुले तौर पर सत्ता-साझेदारी की मांग उठा रहे हैं। इन परिस्थितियों में कांग्रेस अब सोमवार को होने वाले महत्वपूर्ण आंतरिक मंथन के लिए तैयार हो रही है, जहां कर्नाटक की सत्ता संरचना को लेकर अगले कदम तय हो सकते हैं।
कर्नाटक कांग्रेस में यह उथल-पुथल स्पष्ट संकेत है कि 2.5 साल पूरे होने के साथ ही पावर-सेंटर्स के बीच तनाव अब सतह पर आ गया है, भले ही पार्टी इसे सार्वजनिक रूप से पूरी तरह खारिज कर रही हो।
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