भारत में बच्चों की मौतों से जुड़े कफ सिरप मामले की जांच नए मुकाम पर पहुँच गई है। केंद्रीय और राज्य स्तरीय दवा सुरक्षा अधिकारियों को आशंका है कि स्रेसन फ़ार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चर द्वारा बनाए गए कोल्ड्रिफ कफ सिरप की एक खेप में इस्तेमाल किया गया सॉल्वेंट औद्योगिक रसायन से दूषित था। यही दूषण कथित तौर पर उन मौतों का कारण बन सकता है, जिनका संबंध डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) सेवन से जुड़ा पाया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि भारत ने जहरीली दवाइयों की बिक्री रोकने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन और कठोर निगरानी की आवश्यकता है। परीक्षणों में Coldrif सिरप के नमूनों में DEG की मात्रा अनुमत सीमा से लगभग 500 गुना अधिक मिली, जो की बच्चों में किडनी फेल होने और मौतों के लिए जिम्मेदार पाया जाने वाला यही रसायन है।
तमिलनाडु के तीन स्वास्थ्य अधिकारियों ने रुटर्स मीडिया एजेंसी को बताया कि उनका संदेह है कि इस कफ सिरप में उपयोग किया गया प्रोपलीन ग्लाइकोल (PG), जो सिरप बनाने के लिए आवश्यक सॉल्वेंट है, संभवतः DEG से दूषित था।
स्रेसन ने 25 मार्च को सनराइज बायोटेक नामक स्थानीय वितरक से 50 किलो PG खरीदा था। सनराइज ने उसी दिन यह PG Jinkushal Aroma नामक एक छोटे केमिकल उत्पादक से खरीदा, जो मुख्य रूप से डिटर्जेंट में खुशबू लाने के लिए जरुरी मिश्रण बनाता है।
चौंकाने वाली बात यह है की, दोनों कंपनियों के पास फार्मास्यूटिकल-ग्रेड सामग्री हैंडल करने का लाइसेंस नहीं है, फिर भी उनके माध्यम से यह सामग्री दवा निर्माण में पहुँच गई, जो दवाओं के लिए बने कानून का सीधा उल्लंघन है।
सनराइज ने माना कि उसने PG को सील-रहित कंटेनर में पैक करके भेजा। दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले PG आमतौर पर पूरी तरह सील किए हुए कंटेनरों में आते हैं ताकि दूषण की कोई संभावना न रहे।
जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि DEG कैसे इस सप्लाई चेन में शामिल हो गया, क्या गलती से मिल गया? क्या सस्ता विकल्प होने के कारण लापरवाही से इस्तेमाल किया गया? स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार भारत में पहले भी कई मामलों में DEG को जानबूझकर या अनजाने में महंगे PG के स्थान पर मिलाया जाता रहा है।
बच्चों की मौतों के बाद राज्य दवा नियामक ने स्रेसन की चेन्नई के बाहर स्थित फैक्ट्री का निरीक्षण किया। निरीक्षण रिपोर्ट (3 अक्टूबर) में “अस्वच्छ परिस्थितियों” में दवाइयाँ रखने, रिकॉर्ड में “फर्जीवाड़ा”, और सैकड़ों गंभीर उल्लंघन जैसी बातें सामने आईं। हालांकि इन उल्लंघनों को सीधे मौतों से नहीं जोड़ा गया, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि निर्माण प्रक्रिया में गंभीर खामियां मौजूद थीं।
स्रेसन ने अधिकारियों को बताया कि इस्तेमाल किया गया PG दक्षिण कोरियाई कंपनी SK पिकग्लोबल का उत्पाद था। वितरकों द्वारा उपलब्ध कराए गए सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस में इसकी रासायनिक संरचना का विवरण भी दिया गया है। SK पिकग्लोबल ने कहा कि दस्तावेज़ असली जैसा लगता है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट् इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते।
अधिकारियों का मानना है कि यह त्रासदी संभवतः लाइसेंस के बिना रसायन हैंडलिंग, सप्लाई चेन में लापरवाही, फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी का संयुक्त परिणाम हो सकती है। इस समय जांच का केंद्र यह समझना है कि PG में DEG मिला कैसे सप्लाई चेन के किस स्तर पर, और किसकी गलती या लापरवाही से। जांच जारी है और केंद्र सरकार ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दवा निर्माण और रसायन सप्लाई चेन पर कड़े नियामकीय कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
यह भी पढ़ें:
“पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में केमिकल हथियारों का इस्तेमाल किया”
लोकल ट्रेन में ‘मराठी न बोलने’ पर 19 वर्षीय छात्र पर हमला; पीड़ित ने की आत्महत्या



