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Friday, October 30, 2026
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ऑपरेशन सिंदूर में सफलता के बाद भारत चाहता है इसका और उन्नत हथियार !

S-500 को S-400 का अगला संस्करण माना जाता है और यह कहीं अधिक उन्नत तथा व्यापक कवरेज वाला प्लेटफॉर्म है। यह 600 किलोमीटर तक की दूरी से खतरों को रोक सकता है और करीब 200 किलोमीटर की ऊंचाई तक के लक्ष्यों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम है।

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन 4–5 दिसंबर को भारत दौरे पर आ रहे हैं और इस यात्रा के केंद्र में दोनों देशों की दशकों पुरानी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना शामिल है। भारत इस दौरान रूस के उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम S-500 पर गंभीरता से चर्चा करने जा रहा है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब हाल में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा तैनात S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने अपनी क्षमता साबित की और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों तथा ड्रोन को लंबी दूरी पर ही मार गिराकर नई मिसाल स्थापित कर दी।

S-400 को रूस के अल्माज सेंटरल डिज़ाइन ब्यूरो ने विकसित किया है और इसे दुनिया के सबसे घातक और प्रभावी एयर-डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। यह प्रणाली विमान, ड्रोन, क्रूज़ मिसाइल और यहां तक कि बैलिस्टिक मिसाइलों को भी ट्रैक और इंटरसेप्ट कर सकती है। इसे तैनात करने में केवल कुछ मिनट लगते हैं और इसकी मिसाइलें सैकड़ों किलोमीटर की दूरी से खतरों को निष्क्रिय कर सकती हैं। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पहली बार इस प्रणाली को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया और पाकिस्तान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई को बिल्कुल शुरुआती चरण में ही विफल कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, S-400 ने 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर एक विमान को निशाना बनाकर रिकॉर्ड बनाया। बाद में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने भी पुष्टि की कि इस प्रणाली की मदद से भारतीय वायुसेना ने पाँच पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को मार गिराया। उन्होंने इसे “गेम-चेंजर” बताया और कहा कि S-400 की लंबी मारक क्षमता ने पाकिस्तान के विमान और उनकी लंबी दूरी की ग्लाइड बम क्षमता को पूरी तरह बेअसर कर दिया।

इसी सफलता के बाद भारत अब अधिक उन्नत एयर-डिफेंस सिस्टम S-500 Prometheus में दिलचस्पी दिखा रहा है। S-500 को S-400 का अगला संस्करण माना जाता है और यह कहीं अधिक उन्नत तथा व्यापक कवरेज वाला प्लेटफॉर्म है। यह 600 किलोमीटर तक की दूरी से खतरों को रोक सकता है और करीब 200 किलोमीटर की ऊंचाई तक के लक्ष्यों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह न सिर्फ हवाई खतरों, ड्रोन, क्रूज़ मिसाइल या बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक सकता है, बल्कि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल जैसे आधुनिक और उभरते खतरों का भी मुकाबला करने में सक्षम है।

विशेषज्ञों के अनुसार, S-500 में लगी 77N6-N1 मिसाइल चीन के J-20 जैसे स्टील्थ फाइटर को गिराने की क्षमता भी रखती है। हालांकि यह प्रणाली S-400 की तुलना में काफी महंगी और जटिल है, लेकिन भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति में इसकी भूमिका को लेकर ऊंचे स्तर पर विचार चल रहा है।

पुतिन की यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर कई अहम चर्चाएँ अपेक्षित हैं। यह साफ है कि भारत पहले ही S-400 की वजह से अपनी वायु-रक्षा क्षमता को नए स्तर पर ले जा चुका है और S-500 की संभावित खरीद भविष्य में इस शक्ति को कई गुना बढ़ा सकती है।

हालांकि अंतिम फैसला बातचीत के बाद ही सामने आएगा, लेकिन यह तय है कि भारत अपनी एयर-डिफेंस कवच को और मजबूत बनाने के लिए अगले कदम की तैयारी कर चुका है।

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