संसद के शीतकालीन सत्र के आठवें दिन, सोमवार (8 दिसंबर)को संसद में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पुरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित चर्चा की शुरुवात में प्रधानमंत्री मोदी भाषण किया। देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस गीत के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में संसद में खास चर्चा जारी है। दौरान पीएम मोदी ने याद दिलाया है की जब वंदे मातरम गीत के 50 वर्ष पुरे हुए तब देश गुलामी में जीने के लिए मजबूर था और जब 100 साल पूरे हुए तो देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था।
दरम्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बोलते हुए वंदे मातरम् पर हो रही चर्चा को गौरव का पल बताया। उन्होंने कहा, “हमने इस महत्वपूर्ण अवसर पर एक सामूहिक चर्चा का रास्ता चुना है। जिस मंत्र और जयघोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा और प्रेरणा दी थी और त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था। उस वंदे मातरम् को स्मरण करना हम लोगों का सौभाग्य है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हम इस पल के साक्षी बन रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “एक ऐसा कालखंड जो हमारे सामने इतिहास की अनगिनत घटनाओं को अपने सामने लेकर आता है। यह चर्चा सदन की प्रतिबद्धता को तो प्रकट करेगी ही, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह शिक्षा का कारण बन सकती है अगर हम इसका सदुपयोग करेंगे। आज हम वंदे मातरम की 150 वर्ष की सामूहिक ऊर्जा की अनुभूति कर रहे हैं।”
पीएम मोदी ने वंदे मातरम् के 150 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए कहा, “यह यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी है, लेकिन वंदे मातरम् 50 वर्ष पूरे हुए तो देश गुलामी में जीने के लिए मजबूत था। जब 100 साल पूरे हुए तो देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। भारत के संविधान का गला घोंट दिया गया था। देशभक्ति के लिए जीने-मरने वाले लोगों को जेल में बंद कर दिया गया था। दुर्भाग्य से एक काला कालखंड हमारे इतिहास में उजागर हो गया। 150 वर्ष उस महान अध्याय और गौरव को दोबारा स्थापित करने का अवसर है। मैं मानता हूं कि सदन और देश को इस अवसर को जाने नहीं देना चाहिए। यही वंदे मातरम् है, जिसने 1947 में देश को आजादी दिलाई।”
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