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बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने मेहुल चोकसी की प्रत्यर्पण याचिका खारिज की, भारत लाने का रास्ता साफ

अदालत ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं के पालन की पुष्टि करते हुए चोकसी की अपील खारिज कर दी और उस पर €104.01 की कानूनी लागत भी लगाई।

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भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को एक बड़ा कानूनी झटका देते हुए बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने उसकी भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है। बुधवार, 17 अक्टूबर को बेल्जियम की कोर्ट ऑफ कैसेशन ने चोकसी की आपत्तियों को कमजोर और निराधार बताते हुए कहा कि प्रत्यर्पण रोकने के लिए वह कोई ठोस कानूनी या तथ्यात्मक आधार पेश करने में विफल रहा। अदालत के इस फैसले से चोकसी को भारत लाए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

अपने विस्तृत आदेश में सर्वोच्च अदालत ने एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पहले ही चोकसी के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी जा चुकी थी। अदालत ने कहा कि पूरी प्रत्यर्पण प्रक्रिया बेल्जियम के कानून के अनुरूप है और यूरोपीय मानवाधिकार मानकों का पालन करती है।

मेहुल चोकसी ने प्रत्यर्पण के खिलाफ तीन प्रमुख आधारों पर चुनौती दी थी। उसने दावा किया था कि उसके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हुआ है, उसे भारत की संलिप्तता से एंटीगुआ से अपहरण किया गया, और भारत में उसे यातना या अमानवीय जेल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने इन तीनों दलीलों को खारिज कर दिया।

निष्पक्ष सुनवाई के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि जिन दस्तावेज़ों पर चोकसी ने आपत्ति उठाई, उन पर अपील चरण में विचार किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि चैंबर ऑफ इंडिक्टमेंट को सभी तर्क सुनने और प्रासंगिक सामग्री स्वीकार करने का पूरा अधिकार है। इसलिए यूरोपीय मानवाधिकार अभिसमय के अनुच्छेद 6 के तहत चोकसी के अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ।

एंटीगुआ से कथित अपहरण के दावे के समर्थन में चोकसी ने इंटरपोल की कमीशन फॉर द कंट्रोल ऑफ फाइल्स (CCF) के एक निर्णय का हवाला दिया था। हालांकि, अदालत ने कहा कि एंटवर्प अदालत ने उस निर्णय के साक्ष्य मूल्य की जांच की थी, जिसकी भाषा सतर्क और सशर्त थी। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों का मूल्यांकन निचली अदालत का अधिकार क्षेत्र है और वह उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।

भारत में जेल की स्थिति को लेकर उठाई गई आशंकाओं पर अदालत ने भारत सरकार की स्पष्ट गारंटी को स्वीकार किया। आदेश में दर्ज है कि चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल में बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा, जहां दो सेल और निजी स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही, चोकसी न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में रहेगा, न कि जांच एजेंसियों के सीधे नियंत्रण में। अदालत ने कहा कि चोकसी किसी भी तत्काल, वास्तविक या व्यक्तिगत खतरे को साबित नहीं कर पाया।

अदालत ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं के पालन की पुष्टि करते हुए चोकसी की अपील खारिज कर दी और उस पर €104.01 की कानूनी लागत भी लगाई।

गौरतलब है कि मेहुल चोकसी और उसका भतीजा नीरव मोदी ₹13,000 करोड़ के पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी हैं। दोनों पर मुंबई के ब्रैडी हाउस ब्रांच में अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) और विदेशी क्रेडिट पत्रों के जरिए बैंक को चूना लगाने का आरोप है। भारत में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं और अब बेल्जियम अदालत के फैसले के बाद चोकसी के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।

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