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Wednesday, March 18, 2026
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कस्टोडियल डेथ केस में जहूर जैदी को हाईकोर्ट से राहत!

हाई कोर्ट ने जैदी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक उनकी अपील पर अंतिम सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक उनकी सजा लागू नहीं होगी।

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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पुलिस के पूर्व आईजी जहूर हैदर जैदी की उम्रकैद की सजा फिलहाल सस्पेंड कर दी है। हाई कोर्ट ने जैदी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक उनकी अपील पर अंतिम सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक उनकी सजा लागू नहीं होगी।

इससे पहले जनवरी में चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत ने जैदी और सात अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ये केस 2017 में शिमला के कोटखाई में हुई एक बच्ची के रेप और मर्डर से जुड़ा था।

इस केस में आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में टॉर्चर के कारण मौत हो गई थी। उस समय यह मामला शिमला से चंडीगढ़ सीबीआई अदालत में ट्रांसफर किया गया था और वहां जनवरी 2025 में फैसला आया।

जैदी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान जैदी के वकील ने कहा कि जैदी उस समय पुलिस स्टेशन में मौजूद नहीं थे, जब सूरज की मौत हुई। वह अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए पहले से छुट्टी पर थे। साथ ही, जैदी पहले से ही लगभग पांच साल से अधिक समय से कस्टडी में हैं और कई अपीलें लंबित हैं, इसलिए उनका केस जल्दी से निपटाना मुश्किल है। उनका तर्क है कि इन परिस्थितियों में सजा को सस्पेंड किया जाना चाहिए।

राज्य की ओर से पेश वकील ने सजा सस्पेंड करने का विरोध किया और कहा कि अपील की सुनवाई तो की जा सकती है, लेकिन सजा को सस्पेंड करना उचित नहीं है। हाई कोर्ट ने इस पर ध्यान देते हुए फिलहाल सजा सस्पेंड कर दी, ताकि अपील पर न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो सके।

गौरतलब है कि जहूर हैदर जैदी उस समय हिमाचल प्रदेश के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस थे और एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की निगरानी कर रहे थे। सीबीआई ने उन्हें दोषी ठहराया और माना कि उन्होंने मामले में कबूलनामा कराने की साजिश रची थी। इस कारण सूरज की कस्टोडियल डेथ हुई।

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, जैदी अब तक लगभग 5 साल, 2 महीने और 14 दिन कस्टडी में रह चुके हैं। अब उनकी अपील पर अंतिम फैसला आने तक उन्हें जेल में नहीं रखा जाएगा। हाई कोर्ट ने सजा सस्पेंड करते हुए यह साफ कर दिया कि यह सिर्फ अपील की सुनवाई तक की अस्थायी राहत है।

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