दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में UAPA के तहत जेल में बंद उमर खालिद को लेकर अमेरिकी संसद से हलचल दिखाई दे रही है। अमेरिका के आठ डेमोक्रेटिक सांसदों ने वाशिंगटन स्थित भारत के राजदूत को पत्र लिखकर उमर खालिद को जमानत देकर, खालिद की निष्पक्ष व समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। सांसदों ने खालिद की पांच साल से अधिक समय तक बिना ट्रायल के हिरासत पर सवाल उठाए हैं।
यह पत्र अमेरिकी प्रतिनिधि जिम मैकगवर्न और जेमी रैस्किन के नेतृत्व में लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि खालिद की निरंतर हिरासत और अब तक मुकदमे की शुरुआत न होना अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों के अनुरूप नहीं दिखता। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में क्रिस वैन होलेन, पीटर वेल्च, प्रमिला जयपाल, जैन शकॉव्स्की, राशिदा त्लैब और लॉयड डॉगेट भी शामिल हैं।
पत्र में सांसदों ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान जताते हुए कहा, हम भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान रखते हैं, लेकिन साथ ही यह भी पूछा कि पांच साल बाद भी न्यायिक कार्यवाही शुरू न होना किस तरह कानून के शासन के सिद्धांतों से मेल खाता है। सांसदों ने यह स्पष्ट करने की मांग की कि खालिद के मामले में सुनवाई में इतनी देरी क्यों हुई है।
अमेरिकी सांसदों ने भारत सरकार से आग्रह किया कि उमर खालिद को उचित कानूनी प्रक्रिया प्रदान की जाए और उनके मामले की निष्पक्ष व समय पर सुनवाई हो। साथ ही अमेरिकी सांसदों ने आतंकवाद-रोधी कानून के तहत लंबे समय तक प्री-ट्रायल डिटेंशन के इस्तेमाल और उसके नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है।
जिम मैकगवर्न ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर भी उठाते हुए लिखा, “इस महीने की शुरुआत में, मैंने उमर खालिद के माता-पिता से मुलाकात की, जो भारत में पांच साल से अधिक समय से बिना मुकदमे के जेल में बंद हैं।” उन्होंने आगे कहा कि वह और जेमी रैस्किन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भारतीय अधिकारियों से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप जमानत और शीघ्र, निष्पक्ष सुनवाई की मांग कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि भारतीय अदालतों ने उमर खालिद को कुछ सीमित अवसरों पर अंतरिम जमानत दी है। 11 दिसंबर को दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें 16 से 29 दिसंबर तक अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दी थी। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़े षड्यंत्र के मामले में यह राहत दी।
अदालत ने खालिद को 20,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की दो जमानतों पर रिहा किया था। इस अवधि के दौरान सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक, गवाहों से संपर्क न करने और जांच अधिकारी को मोबाइल नंबर देने जैसी शर्तें लगाई गई थीं। खालिद को 29 दिसंबर की शाम जेल में आत्मसमर्पण करने का निर्देश भी दिया गया था। इससे पहले भी उमर खालिद को 2022 और 2023 में पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए इसी तरह की अंतरिम जमानत दी जा चुकी है। हालांकि, मुख्य मामले में नियमित जमानत और ट्रायल की शुरुआत अब भी लंबित है।
यह भी पढ़ें:
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने EVM पर करवाया सर्वे; 83% से अधिक ने EVM पर जताया भरोसा
गंभीर रूप से असुरक्षित है आईएमएफ की खैरात पर टिकी पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था: रिपोर्ट
पहलगाम हमले का किंगपिन सैफुल्लाह कसूरी ने फिर दी भारत को धमकी; ‘भारत ने बड़ी गलती की’



