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ईरान में अशांति का दौर जारी; 35 की मौत, रूस भागने की योजना बना रहे खामेनेई

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ईरान में जारी आर्थिक विरोध प्रदर्शनों ने गंभीर रूप ले लिया है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (HRANA) के अनुसार, हिंसा में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है। एजेंसी ने मंगलवार (6 जनवरी) को दावा किया कि एक हफ्ते से अधिक समय से जारी प्रदर्शनों के दौरान 1,200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों में 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरान की सुरक्षा बलों के दो सदस्य शामिल हैं।

अल जज़ीरा के हवाले से सेमी-ऑफिशियल फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि प्रदर्शन ईरान के 31 में से 27 प्रांतों के 250 से अधिक स्थानों तक फैल चुके हैं। राजधानी तेहरान के पूर्वी हिस्सों नोवोबत और तेहरान पार्स, पश्चिमी इलाकों एक्टेबान, सादेघियेह और सत्तारखान, तथा दक्षिणी क्षेत्रों नाज़ियाबाद और अब्दोलाबाद में बड़े प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कई शहरों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

इसी बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई को लेकर एक और सनसनीखेज दावा सामने आया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सुरक्षा बल विरोध को दबाने में विफल रहते हैं तो खामेनेई के पास रूस भागने की एक वैकल्पिक योजना है। एक खुफिया सूत्र के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई अपने करीबी 20 सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ तेहरान छोड़ सकते हैं। सूत्र ने कहा, “‘प्लान बी’ खामेनेई और उनके बेहद करीबी सहयोगियों और परिवार के लिए है, जिसमें उनके बेटे और नामित उत्तराधिकारी मोजतबा भी शामिल हैं।”

4 जनवरी को खामेनेई ने प्रदर्शनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि,“दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी चाहिए।” उन्होंने कहा, “हम प्रदर्शनकारियों से बात करते हैं, अधिकारियों को उनसे बात करनी चाहिए. लेकिन दंगाइयों से बात करने का कोई फायदा नहीं है। दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी चाहिए।”

मौतों की बढ़ती संख्या के बीच अमेरिका के संभावित हस्तक्षेप को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार(3 जनवरी) को चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्या करता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। ट्रंप की इस टिप्पणी पर ईरानी नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी है। यह चेतावनी भी ऐसे समय आई जब अमेरिकी सेना ने शनिवार को तेहरान के करीबी सहयोगी और वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया।

इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह ईरान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था है। बीबीसी के अनुसार, ईरानी रियाल बीते एक साल में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 80 प्रतिशत तक गिर चुका है। देश में महंगाई दर करीब 42 प्रतिशत है, खाद्य महंगाई 70 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है, जबकि कुछ ज़रूरी वस्तुओं की कीमतों में 110 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

अल जज़ीरा के मुताबिक, विरोध की शुरुआत 28 दिसंबर को दुकानदारों की हड़ताल से हुई थी, जो बाद में राजनीतिक नारों और मांगों में बदल गई। यह 2022 के बाद से ईरान का सबसे बड़ा विरोध आंदोलन माना जा रहा है, हालांकि यह अभी महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों जितना व्यापक नहीं है।

ईरानी सरकारी मीडिया ने प्रदर्शनों को लेकर सीमित जानकारी दी है, जबकि सोशल मीडिया पर सामने आ रहे वीडियो हालात की गंभीरता की झलक दिखाते हैं। स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम और तेज़ हो सकता है।

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