33 C
Mumbai
Tuesday, January 13, 2026
होमन्यूज़ अपडेटPSLV की विफलता में DRDO की सैटेलाइट ही नहीं, भारत के ‘कॉस्मिक...

PSLV की विफलता में DRDO की सैटेलाइट ही नहीं, भारत के ‘कॉस्मिक सर्वर’ का सपना भी टूटा

Google News Follow

Related

श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र की सुबह एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति का संकेत दे रही थी, लेकिन उड़ान के महज आठ मिनट बाद ही यह सपना टूट गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का PSLV-C62 मिशन,  भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक निर्णायक कड़ी माना जा रहा था, तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हो गया।

सोमवार (12 जनवरी) सुबह 10:18 बजे IST PSLV-C62 ने उड़ान भरी। रॉकेट के पहले दो चरण पूरी तरह सामान्य रहे और मिशन कंट्रोल में सब कुछ योजना के मुताबिक आगे बढ़ता दिखा। लेकिन जैसे ही रॉकेट तीसरे चरण में प्रवेश कर रहा था, परफॉर्मेंस डिस्टर्बेंस दर्ज किया गया। कुछ ही क्षणों में टेलीमेट्री डेटा बाधित हो गया और रॉकेट का ट्रैक तय मार्ग से भटकने लगा। इसके बाद मिशन को लेकर अनिश्चितता गहराती चली गई।

इस मिशन के साथ केवल एक DRDO सैटेलाइट ही नहीं, बल्कि भारत के एक महत्वाकांक्षी ऑर्बिटल डेटा हब का सपना भी जुड़ा हुआ था। इस मिशन में शामिल MOI-1 पेलोड को दुनिया के पहले “स्पेस सर्वर रूम” की आधारशिला माना जा रहा था। यह एक 6-किलोवाट का ऑर्बिटल डेटा और पावर हब था, जिसे लगभग 500 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया जाना था।

इस परियोजना के पीछे हैदराबाद स्थित स्टार्टअप्स TakeMe2Space और Eon Space Labs का साझा विज़न था। उनका उद्देश्य अंतरिक्ष में एक ऐसा डिस्ट्रिब्यूटेड पावर और डेटा ग्रिड बनाना था, जहां छोटे और ऊर्जा-सीमित उपग्रह “प्लग-इन” होकर रीयल-टाइम में बड़े डेटा और एआई मॉडल प्रोसेस कर सकें। इसे वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए एक तरह का कॉस्मिक पावर बैंक माना जा रहा था।

यदि यह प्रयोग सफल होता, तो भारत सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च करने वाला देश नहीं, बल्कि स्पेस-इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर के रूप में उभर सकता था। यह परियोजना भारत को सिग्नल रिले करने वाली पारंपरिक भूमिका से आगे ले जाकर अंतरिक्ष आधारित डेटा प्रोसेसिंग और ऊर्जा आपूर्ति के केंद्र में खड़ा कर सकती थी।

हालांकि, मिशन की विफलता के साथ यह महत्वाकांक्षी रोडमैप फिलहाल ठहर गया है। MOI-1 अपने तय कक्ष में नहीं पहुंच सका और मिशन सोमवार को भारी निराशा के साथ समाप्त हुआ। इसरो ने पुष्टि की है कि तीसरे चरण में आई तकनीकी गड़बड़ी के डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी।

इसके बावजूद, परियोजना से जुड़े स्टार्टअप्स ने संकेत दिया है कि वे अपने दीर्घकालिक विज़न से पीछे नहीं हटेंगे। यह असफलता एक बार फिर याद दिलाती है कि भले ही इंटरनेट और डेटा की भूगोल बदलने को तैयार हो, लेकिन अंतरिक्ष का द्वार अब भी बेहद कठोर और चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

यह भी पढ़ें:

अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी : केंद्र!

आदित्य धर की ‘धुरंधर’ पर फिदा हुए सुभाष घई, कहा- ‘आप बधाई से ज्यादा के हकदार हो’

“US के लिए भारत से ज़्यादा ज़रूरी कोई पार्टनर नहीं है”

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,441फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
287,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें