28 C
Mumbai
Wednesday, January 14, 2026
होमदेश दुनियाएआई के बढ़ते प्रभाव से अमेरिकी टेक कंपनियां और अमेरिकी बिजली ग्रिड...

एआई के बढ़ते प्रभाव से अमेरिकी टेक कंपनियां और अमेरिकी बिजली ग्रिड ऑपरेटर्स के बीच टकराव

Google News Follow

Related

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की वैश्विक दौड़ तेज होने के साथ ही अमेरिका में बिग टेक कंपनियों और बिजली ग्रिड ऑपरेटरों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। एआई बूम को चलाने वाले विशाल डेटा सेंटरों की ऊर्जा मांग अमेरिकी पावर ग्रिड पर भारी दबाव डाल रही है, जिससे ऊर्जा की उपलब्धता और ग्रिड की विश्वसनीयता को लेकर अभूतपूर्व तनाव पैदा हो गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियां अपने हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स के लिए सैकड़ों गीगावॉट अतिरिक्त बिजली क्षमता की मांग कर रही हैं। ये डेटा सेंटर क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई मॉडल के प्रशिक्षण की रीढ़ हैं और इन्हें चौबीसों घंटे भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। हालांकि, पुरानी ग्रिड संरचना और निवेश की धीमी रफ्तार के चलते अमेरिकी बिजली व्यवस्था इस तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने में संघर्ष कर रही है।

बढ़ते अंतर को पाटने के लिए ग्रिड ऑपरेटर्स ने टेक कंपनियों के सामने कुछ कड़े विकल्प रखे हैं। इनमें से एक प्रस्ताव है “ब्रिंग योर ओन जनरेशन”, जिसके तहत कंपनियों को अपने डेटा सेंटरों के साथ अलग से बिजली उत्पादन के साधन जोड़ने होंगे। इसमें छोटे प्राकृतिक गैस प्लांट, इनोवेटिव ऊर्जा परियोजनाएं या यहां तक कि न्यूक्लियर माइक्रोरिएक्टर भी शामिल हो सकते हैं, ताकि वे सार्वजनिक ग्रिड पर पूरी तरह निर्भर न रहें।

एक अन्य विवादास्पद प्रस्ताव के तहत टेक कंपनियों को ग्रिड से शर्तों के साथ जल्दी कनेक्शन दिया जा सकता है, लेकिन अत्यधिक मांग के समय ब्लैकआउट से बचने के लिए उनके डेटा सेंटर्स की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से काटी जा सकती है।

यह टकराव खास तौर पर PJM इंटरकनेक्शन के तहत आने वाले इलाकों में तेज है, जो पेंसिल्वेनिया, वर्जीनिया और ओहायो सहित 13 अमेरिकी राज्यों में बिजली आपूर्ति संभालता है। इसके अलावा टेक्सास (ERCOT) और साउथवेस्ट पावर पूल (SPP) के क्षेत्र भी डेटा सेंटर विकास के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। इन इलाकों में सस्ती जमीन और अपेक्षाकृत कम बिजली दरें निवेश को आकर्षित कर रही हैं, लेकिन प्रस्तावित मांग मौजूदा क्षमता से कहीं अधिक है।

टेक कंपनियां, खासकर अस्थायी कटौती के प्रस्ताव का विरोध कर रही हैं। उनके लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति अनिवार्य है, क्योंकि उनके डेटा सेंटर वित्त, स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को ऊर्जा देते हैं, जहां कुछ सेकंड का व्यवधान भी गंभीर असर डाल सकता है।

डेटा सेंटर कोएलिशन ने एक बयान में कहा, “डेटा सेंटर्स के लिए एक भरोसेमंद बिजली ग्रिड अनिवार्य है, क्योंकि वे महत्वपूर्ण संचालन को सहारा देने के लिए निरंतर और बिना रुकावट बिजली पर निर्भर करते हैं।” कंपनियों का यह भी तर्क है कि बैकअप के लिए डीजल जनरेटर पर निर्भरता स्थानीय वायु गुणवत्ता नियमों और पर्यावरणीय लक्ष्यों के विपरीत हो सकती है।

यह ऊर्जा संघर्ष ऐसी अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी बड़ी चुनौती खड़ी कर चुके है, जो एआई पर भविष्य की वृद्धि का दांव लगा रही हैं। अकेले अमेरिका में दशक के अंत तक डेटा सेंटर्स की बिजली मांग दोगुनी होने का अनुमान है। यह टकराव दिखाता है कि तकनीकी निर्माण की रफ्तार इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले निवेश से कहीं अधिक आगे निकल चुकी है।

यदि ग्रिड क्षमता और ट्रांसमिशन ढांचे में बड़े स्तर पर अपडेट नहीं हुए, तो अत्याधुनिक एआई सिस्टम भी बिजली की कमी जैसी पारंपरिक समस्या से सीमित हो सकते हैं। फिलहाल, हाइपरस्केल कंपनियां विश्वसनीयता पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं, जबकि ग्रिड ऑपरेटर्स पर सिस्टम की स्थिरता बनाए रखने का दबाव है।

यह भी पढ़ें:

BRICS इंडिया का लोगो हुआ लॉन्च: विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘साझा चुनौतियों’ का सामना करने पर दिया जोर

“जो राष्ट्र तैयार रहते हैं, वही टिकते हैं।”

जमशेदपुर के गांव में प्रज्ञा केंद्र संचालक भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,437फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
287,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें