देश और दुनिया के बाजारों में जबरदस्त उथल-पुथल के बीच कीमती धातुओं ने नया इतिहास रच दिया है। सोने की कीमत पहली बार एक लाख पचास हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई है, जबकि चांदी ने भी तीन लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार करते हुए ऑल-टाइम हाई बना लिया है। निवेशकों में सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की बढ़ती मांग इसका बड़ा कारण मानी जा रही है।
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका-चीन व्यापार अनिश्चितता, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मंदी की आशंका ने निवेशकों को सोने-चांदी की ओर मोड़ दिया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद भी कीमतों को मजबूत सहारा दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर बना हुआ है, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर दिख रहा है।
इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर होकर 90 के पार चला गया है। रुपये की कमजोरी ने आयात महंगा कर दिया है, जिसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी रुपये पर दबाव बना हुआ है।
बाजार जानकारों के मुताबिक, अगर वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और डॉलर मजबूत रहता है, तो सोने-चांदी में तेजी का रुख फिलहाल जारी रह सकता है। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का जोखिम भी बना हुआ है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में फैसले न लें और लंबी अवधि की रणनीति के साथ ही निवेश करें।
कुल मिलाकर, रिकॉर्ड तोड़ते सोना-चांदी और कमजोर रुपया आने वाले दिनों में महंगाई और आम आदमी की जेब पर भी असर डाल सकते हैं, जिस पर सरकार और रिजर्व बैंक की नजर बनी हुई है।
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