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मथुरा के सरकारी स्कूल का हेडमास्टर बच्चों से जबरन पढ़वाता था नमाज़, निलंबित

जबरन धर्मांतरण का लगा आरोप

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उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से सरकारी शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर जान मोहम्मद पर छात्रों से नमाज़ पढ़वाने, इस्लाम को अन्य धर्मों से श्रेष्ठ बताने और जबरन धर्मांतरण की कोशिश करने के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी हेडमास्टर को निलंबित कर दिया है।

यह मामला मांट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नौझील प्राथमिक विद्यालय का है। शिकायत मिलने के बाद BSA ने दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में जान मोहम्मद को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया।

शिकायत के अनुसार, जान मोहम्मद ने स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को नियमित रूप से नमाज़ पढ़ने के लिए दबाव डाला। इतना ही नहीं, उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया और इस्लाम को दुनिया का सबसे बेहतर मज़हब बताकर बच्चों को उसी का पालन करने के लिए उकसाया। आरोप है कि उसके कार्यकाल में स्कूल में राष्ट्रीय गान तक नहीं गाया गया, और जो बच्चे राष्ट्रगान गाने की कोशिश करते थे, उन्हें डांटा जाता था।

मामले को और गंभीर बनाते हुए यह भी सामने आया है कि जान मोहम्मद ने अपनी मौजूदगी में तबलीगी जमात के सदस्यों को स्कूल में बुलाया, जहां बच्चों को इस्लाम की शिक्षा दी गई और कथित तौर पर धर्मांतरण का प्रयास किया गया। स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे हिंदू समुदाय से हैं।

बीजेपी बजना मंडल के अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान ने आरोप लगाते हुए कहा, “उसने हिंदू धर्म को नीचा दिखाया, हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया और तबलीगी जमात के बाहरी लोगों को स्कूल बुलाकर इस्लाम सिखाया। बच्चों को राष्ट्रीय गान गाने पर डांटा गया और कहा गया कि इस्लाम अन्य धर्मों से श्रेष्ठ है और उन्हें उसी का पालन करना चाहिए।”

जान मोहम्मद के व्यवहार से बच्चे मानसिक रूप से परेशान हो गए थे। उन्होंने घर जाकर अपने माता-पिता को पूरी बात बताई, जिसके बाद परिजनों ने यह मामला बीजेपी नेता के संज्ञान में लाया। अभिभावकों ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और सख्त कार्रवाई की जाए।

BSA रतन कीर्ति ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच कराई गई, जिसमें ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया। उन्होंने कहा,“जान मोहम्मद को निलंबित कर मांट के नगला हुमायूं प्राथमिक विद्यालय से संबद्ध किया गया है। छाता और मांट के BEO को आगे की जांच के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

इस बीच, स्कूल में महिलाओं के साथ उसके व्यवहार को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। आरोप है कि बदनामी के डर से कई महिलाएं सार्वजनिक रूप से अपनी शिकायतें दर्ज नहीं करा सकीं।

यह मामला सरकारी स्कूलों में धार्मिक तटस्थता, बच्चों की सुरक्षा और संविधानिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सबकी नजर विस्तृत जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

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