29.1 C
Mumbai
Tuesday, October 20, 2026
होमवीडियो गैलरीविविधाचन्द्रमा पर यहां उतरेगा चंद्रयान-4

चन्द्रमा पर यहां उतरेगा चंद्रयान-4

भारत का सैंपल-रिटर्न मिशन

Google News Follow

भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-4 मिशन को लेकर एक अहम वैज्ञानिक संकेत सामने आया है। नए अध्ययन के अनुसार, यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित पर्वतीय क्षेत्र मॉन्स माउटन (Mons Mouton) के निकट उतर सकता है। यह जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्पेस एप्लिकेशंस सेंटर (SAC) के वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत शोध से सामने आई है, जिसे लूनर एंड प्लैनेटरी साइंस कॉन्फ्रेंस (LPSC) 2026 में साझा किया गया।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, उच्च-रिज़ॉल्यूशन चंद्र सतह चित्रों और विस्तृत भू-आकृतिक विश्लेषण के आधार पर इस क्षेत्र को सबसे सुरक्षित और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण संभावित लैंडिंग ज़ोन के रूप में चिन्हित किया गया है।

चंद्रयान-4 को भारत का पहला लूनर सैंपल-रिटर्न मिशन माना जा रहा है। इसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह से नमूने जुटाकर कर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना है। यह तकनीकी रूप से चंद्रयान-3 (2023) की सफल सॉफ्ट-लैंडिंग से कहीं अधिक जटिल मिशन होगा, क्योंकि इसमें सुरक्षित लैंडिंग के साथ-साथ चंद्रमा की सतह से उड़ान भरने और पृथ्वी तक वापसी भी करनी होगी। इसी वजह से मिशन के लिए लैंडिंग साइट का चयन सबसे निर्णायक चरण माना जा रहा है।

कैसे चुनी गई लैंडिंग साइट

वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पर मौजूद ऑर्बिटर हाई रेज़ॉल्यूशन कैमरा (OHRC) से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग किया। यह कैमरा चंद्रमा की सतह को लगभग 32 सेंटीमीटर प्रति पिक्सल की स्पष्टता के साथ कैप्चर करने में सक्षम है, जिससे छोटे-से-छोटे गड्ढे, चट्टानें और ढलानों का भी विश्लेषण किया जा सकता है।

चित्रों की मदद से वैज्ञानिकों ने मॉन्स माउटन क्षेत्र के विस्तृत थ्री-डी एलिवेशन मॉडल और हैज़र्ड मैप तैयार किए। अध्ययन में कई अहम मानकों की जांच की गई, जिनमें सतह की ढलान, चट्टानों और क्रेटरों का वितरण, सतह की खुरदुरापन, सूर्य प्रकाश की उपलब्धता, पृथ्वी के साथ संचार की संभावनाएं शामिल हैं।

इस क्षेत्र के भीतर चार संभावित लैंडिंग ज़ोन का गहन अध्ययन किया गया। इनमें से MM-4 नामक साइट को सबसे सुरक्षित विकल्प माना गया है। विश्लेषण के अनुसार, यहां औसतन ढलान लगभग 5 डिग्री है। बड़े बोल्डर और गड्ढों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। कई समतल क्षेत्र मौजूद हैं, जो लैंडिंग और सैंपल कलेक्शन के लिए उपयुक्त हैं। पर्याप्त सूर्य प्रकाश मिलता है, जो दक्षिणी ध्रुव जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है।

मॉन्स माउटन क्षेत्र स्थायी रूप से छाया में रहने वाले क्रेटरों के निकट स्थित है, जहां जल-बर्फ (वॉटर-आइस) की मौजूदगी की संभावना मानी जाती है। यहां से प्राप्त नमूने चंद्रमा के भूवैज्ञानिक इतिहास, सतही संरचना और भविष्य में चंद्रमा पर संसाधनों के उपयोग को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, अंतिम लैंडिंग साइट की पुष्टि लॉन्च के करीब की जाएगी, लेकिन यह अध्ययन अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत देता है कि चंद्रयान-4 भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के दुर्गम लेकिन वैज्ञानिक रूप से समृद्ध इलाके में ले जा सकता है। यह मिशन न केवल भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक चंद्र अनुसंधान में भी देश की भूमिका को मजबूत करेगा।

यह भी पढ़ें:

BCCI से भारत के अंडर-19 विश्व कप चैंपियंस को ₹7.5 करोड़ इनाम की घोषणा

T20 विश्व कप ओपनर से पहले सिद्धिविनायक के चरणों में लीन हुए कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती

इस्लामाबाद मस्जिद विस्फोट: पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास ने जारी किया सुरक्षा अलर्ट

National Stock Exchange

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited
[td_block_social_counter open_in_new_window="y" style="style6 td-social-boxed" block_template_id="td_block_template_9" border_color="#fbd54a" f_header_font_size="26" f_header_font_weight="700" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXRvcCI6IjAiLCJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJwYWRkaW5nLXRvcCI6IjAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn19" custom_title="हमें फॉलो करें" facebook="NewsDankaHindi" twitter="NewsDanka" youtube="channel/UCqtL0xCsgAmB3XXrh9nln2Q" manual_count_twitter="526" f_header_font_family="668"]

अन्य लेटेस्ट खबरें