भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने द हंड्रेड 2026 की नीलामी में पाकिस्तानी स्पिनर अब्रार अहमद को खरीदने को लेकर सनराइजर्स लीड्स के मालिकों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत में योगदान देते हैं।
गावस्कर ने अपने ‘मिड-डे’ कॉलम में लिखा कि भारतीय फ्रेंचाइज़ी द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ियों को दी जाने वाली फीस अंततः टैक्स के रूप में पाकिस्तान सरकार तक पहुंचती है, जिसका इस्तेमाल हथियार खरीदने में होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी टूर्नामेंट को जीतना भारतीय नागरिकों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
दरअसल काव्य मारन की टीम सनराइजर्स हैदराबाद की फ़्रेन्जाइज़ सनराइजर्स लीड्स द्वारा अबरार अहमद को 1.90 लाख पाउंड (करीब 2.34 करोड़ रुपये) में खरीदने के बाद क्रिकेट प्रशंसकों में माहौल गर्म है। यह कई वर्षों में पहली बार है जब किसी आईपीएल से जुडी मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइज़ी ने पाकिस्तानी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को ख़रीदा है।
गावस्कर ने अपने तर्क को विस्तार से समझाते हुए कहा, “द हंड्रेड में एक फ्रैंचाइज़ के भारतीय मालिक द्वारा एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने पर जो हंगामा हुआ, वह कोई हैरानी की बात नहीं है। नवंबर 2008 में मुंबई हमलों के बाद से, भारतीय फ्रैंचाइज़ मालिकों ने IPL के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नज़रअंदाज़ किया है।”
उन्होंने आगे लिखा, “हालांकि देर से ही सही, लेकिन यह एहसास हो रहा है कि पाकिस्तानी प्लेयर को जो फीस दी जाती है, जो फिर अपनी सरकार को इनकम टैक्स देता है, जो हथियार खरीदती है, वह अप्रत्यक्ष तौर पर भारतीय सैनिकों और आम लोगों की मौत में योगदान देती है, इसी वजह से भारतीय कंपनियां पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों को रखने के बारे में सोचने से भी बच रही हैं।”
गावस्कर ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता, चाहे भुगतान भारतीय इकाई करे या उसकी विदेशी सहायक कंपनी। उन्होंने कहा, “चाहे वह भारतीय टीम हो या उस इकाई की विदेशी सहायक कंपनी जो भुगतान कर रही है, अगर मालिक भारतीय है, तो वह भारतीय हताहतों में योगदान दे रहा है। यह इतना सरल है।”
उन्होंने यह भी माना कि टीम के मुख्य कोच डैनियल विटोरी न्यूजीलैंड से हैं, शायद इस जटिलता को पूरी तरह न समझते हों, लेकिन मालिकों को इस स्थिति की गंभीरता समझनी चाहिए थी।
इस पूरे मामले के बीच इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने भी हस्तक्षेप किया। ऑक्शन से पहले ही ईसीबी ने सभी टीमों को पत्र लिखकर चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और भेदभाव-विरोधी नियमों का पालन करने की याद दिलाई थी। हालांकि, उसने किसी विशेष खिलाड़ी को साइन करने या न करने का निर्देश नहीं दिया।
12 मार्च को हुए ऑक्शन में सनराइजर्स लीड्स ने ट्रेंट रॉकेट्स को पछाड़कर अबरार अहमद को अपने साथ जोड़ा। यह ऑक्शन लंदन के पिकाडिली क्षेत्र में आयोजित हुआ, जहां टीम की सीईओ काव्य मारन बोली लगा रहीं थी।
सनराइजर्स द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने के बाद भारतीय क्रिकेट प्रशंसक गुस्से में है। सोशल मीडिया पर कई बार बॉयकॉट सनराइजर्स हैदराबाद कई बार ट्रेंड रह चुका है। काव्य मारन पर आलोचनाओं की बौछार हो चुकी है, जबकी टीम इस बारें में बात करने से बच रही है।
टीम की कप्तानी इंग्लैंड के टी20 कप्तान हैरी ब्रूक करेंगे। वहीं, इस फैसले के बाद भारत में सोशल मीडिया पर सनराइजर्स ब्रांड के बहिष्कार की मांग तक उठने लगी है। यह विवाद केवल एक खिलाड़ी की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेल, राजनीति और नैतिकता के जटिल संबंधों को भी उजागर करता है। गावस्कर के लिए यह मुद्दा क्रिकेट से ज्यादा अंतरात्मा का है, और उनके अनुसार सनराइजर्स लीड्स के मालिक इस कसौटी पर खरे नहीं उतरे।
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