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Wednesday, October 21, 2026
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आतंकवाद के खिलाफ वार करने की भारत की नई नीति ‘प्रहार’

प्रतिक्रियात्मक नहीं सक्रियात्मक होगा जवाब

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बदलते आतंकी खतरों के बीच भारत ने अपनी सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए ‘PRAHAAR’ (प्रहार) नामक नई आतंकवाद विरोधी नीति को सामने रखा है। यह नीति आतंकवाद के खिलाफ केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से खतरे को खत्म करने की रणनीति पर आधारित है। भारतीय गृह मंत्रालय द्वारा 23 फरवरी  को जारी ‘प्रहार’ (PRAHAAR) नीति भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी रणनीति है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की आंतरिक सुरक्षा को आधुनिक और सुदृढ़ बनाना है।

यह नया ढांचा इस बात को स्वीकार करता है कि आज का आतंकवाद केवल हिंसा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और साइबर नेटवर्क के साथ मिलकर एक जटिल खतरे के रूप में उभर चुका है।

आतंकवाद का बदला स्वरूप-बहु-आयामी खतरे पर फोकस

‘PRAHAAR’ नीति के तहत भारत ने आतंकी नेटवर्क्स को निशाना बनाने की तैयारी की है, जो सीमा पार से संचालित होते हैं और ड्रोन, समुद्री रास्तों तथा डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हैं। इसमें नकली मुद्रा, हथियारों और ड्रग्स की तस्करी जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स में आतंकी संगठनों द्वारा समुद्री मार्ग से हमलों की तैयारी के संकेत मिलने के बाद इस नीति की जरूरत और बढ़ गई थी।

एजेंसियों के बीच तालमेल पर जोर

नई नीति की सबसे बड़ी खासियत विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय है। बहु-एजेंसी केंद्र और जॉइंट टास्क फ़ोर्स ऑन इंटेलीजेंस जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान किया जाएगा। स्थानीय पुलिस को भी पहले रिस्पॉन्डर के रूप में सशक्त बनाया जाएगा, ताकि खतरे की पहचान और उसे निष्क्रिय करने के बीच का समय कम किया जा सके।

‘PRAHAAR’ नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका मानवीय दृष्टिकोण भी है। इसमें कट्टरपंथ की शुरुआती अवस्था में फंसे युवाओं के लिए पुनर्वास और काउंसलिंग पर जोर दिया गया है। इसमें सिविल सोसाइटी, धार्मिक विद्वानों और स्थानीय प्रशासन की मदद से युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने की योजना है, ताकि आतंकी संगठनों की भर्ती प्रक्रिया को रोका जा सके।

न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने पर भी फोकस

नीति में यह भी माना गया है कि कई मामलों में सजा दिलाने में कमजोर सबूत एक बड़ी चुनौती बनते हैं। इसलिए ‘PRAHAAR’ के तहत जांच एजेंसियों के साथ कानूनी विशेषज्ञों को शुरुआत से जोड़ा जाएगा, ताकि अदालत में केस मजबूत रह सके।

‘PRAHAAR’ का उद्देश्य केवल आतंकी हमलों को रोकना नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और एजेंसियों के बीच निरंतर सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति भारत को एक ऐसी स्थिति में ले जाएगी, जहां खतरों का प्रतिक्रियात्मक ही नहीं बल्कि सक्रियात्मक जवाब दिया जाएगा।

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