महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से इसका समर्थन करती रही है। उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी के नेतृत्व में पहली बार यह बिल लाया गया था और राज्यसभा में पारित भी हुआ था। बाद में एनडीए सरकार के दौरान इसे लोकसभा से भी सर्वसम्मति से पास किया गया, जिसका सभी दलों ने समर्थन किया।
उन्होंने यह भी कहा कि असली सवाल बिल के ‘मैकेनिज्म’ यानी लागू करने के तरीके को लेकर है। सरकार 16 तारीख को नया सत्र बुलाने की बात कर रही है, लेकिन अभी तक बिल का मसौदा सामने नहीं आया है।
केरल की राजनीति पर बात करते हुए थरूर ने कहा, “एनडीए केरल में जीरो सीट वाली पार्टी है। सरकार बनाने में उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।” उन्होंने दावा किया कि 140 सीटों में से केवल दो-तीन सीटों पर ही एनडीए को गंभीर दावेदार माना जा सकता है और कहीं भी वह बढ़त में नहीं है।
उन्होंने कहा कि कुछ सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला जरूर है, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथ में है। हम लोकतंत्र का सम्मान करते हैं, जनता जो फैसला करेगी, वही अंतिम होगा। अगर एनडीए को एक-दो सीटें मिल भी जाती हैं, तो इससे सरकार गठन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
सबरीमाला मुद्दे पर शशि थरूर ने इसे जनता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, “यह किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति इससे जुड़ा हुआ है। हम सभी सबरीमाला में पूजा करने जाते हैं और जब वहां से मूर्तियों का सोना चोरी होने जैसी घटना होती है, तो यह हमारी आस्था को ठेस पहुंचाती है।” उन्होंने इस घटना को शर्मनाक अपराध बताते हुए कहा कि दोषियों की पहचान कर उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए।
शशि थरूर ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सभी दल एकमत हैं, यहां तक कि सत्ता में बैठी वामपंथी सरकार भी मानती है कि अपराधियों को सजा मिलनी चाहिए। इससे किसी एक पार्टी को खास राजनीतिक फायदा नहीं मिलने वाला, क्योंकि इस मुद्दे पर हर कोई नाराज है।
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