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Saturday, July 11, 2026
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मेरठ लाठीचार्ज मामले में एनएचआरसी ने 15 दिन में रिपोर्ट मांगी! 

शिकायत पर विचार करने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया।

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस लाठीचार्ज और हिरासत में मारपीट के मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और गृह सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों अधिकारियों से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।

यह कार्रवाई प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत डॉ. अंबेडकर जन कल्याण समिति, भोपाल की ओर से आयोग को भेजी गई थी। शिकायत पर विचार करने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर आयोजित शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान स्थानीय पुलिस ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया। आरोप है कि इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर शारीरिक चोटें आईं।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हिरासत में लिए गए निहत्थे लोगों की बेरहमी से पिटाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

शिकायत में आयोग से मांग की गई कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर संबंधित पुलिस अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाए। इसके अलावा घायल प्रदर्शनकारियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा, पुनर्वास और कानून के अनुसार आर्थिक मुआवजा देने की भी मांग की गई है। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई करने की भी अपील की गई है।

एनएचआरसी ने आदेश में कहा है कि शिकायत में लगाए गए आरोप पहली नजर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला प्रतीत होते हैं। इसी आधार पर आयोग ने उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी इस मामले की प्रति भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि मामले से संबंधित रिपोर्ट आयोग को ई-मेल के माध्यम से भी भेजी जाए।

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