संगठन में प्रतिनिधित्व तय करते समय जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वोट बैंक पर भी पार्टी का फोकस साफ नजर आया है। इसे समाजवादी पार्टी के पीडीए समीकरण की काट के तौर पर भी देखा जा रहा है। नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से दो राष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए हैं। स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को यह जिम्मेदारी देकर पार्टी ने प्रदेश को संगठन में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी दी है।
आठ राष्ट्रीय महामंत्रियों में दो उत्तर प्रदेश से हैं, जबकि अन्य राज्यों से एक-एक चेहरे को यह जिम्मेदारी मिली है। भाजपा ने इस बार संगठन में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को भी प्रमुखता दी है। प्रो. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय टीम में शामिल कर पार्टी ने मुस्लिम समाज तक राजनीतिक पहुंच मजबूत करने का संकेत दिया है।
वहीं, पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा की कमान सौंपी गई है। अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी देना खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं, राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की सूची में भी उत्तर प्रदेश को दो स्थान मिले हैं। 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में प्रदेश के दो चेहरे शामिल हैं। रेखा वर्मा को जिम्मेदारी दी है। राष्ट्रीय मंत्रियों की सूची में भी उत्तर प्रदेश की मजबूत मौजूदगी रही।
नई टीम में कुछ पुराने और प्रभावशाली चेहरों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी है। लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अरुण सिंह को इस बार जगह नहीं मिली। इसके अलावा नोएडा के राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर, मेरठ के राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी और गोरखपुर के राधामोहन को भी राष्ट्रीय टीम से बाहर रखा गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व महज संख्या तक सीमित नहीं है। संगठन में ओबीसी, महिला और अल्पसंख्यक चेहरों को जगह देकर पार्टी ने 2027 के चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। वहीं दूसरी ओर पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों में राजनीतिक विस्तार की संभावनाओं को भी साधने का संदेश दिया है।



