सूर्यनमस्कार, वृक्षासन, आंजनेयासन, धनुरासन, भुजंगासन, वीरभद्रासन, एकपाद राजकपोतासन कुछ ऐसे योगाभ्यास हैं, जिन्हें नटराजासन से पूर्व करना चाहिए।
सूर्य नमस्कार- नटराजन से पूर्व सूर्य नमस्कार शरीर को वार्म-अप, लचीलापन बढ़ाने और संतुलन के लिए तैयार करने के लिए किया जाता है। नटराजासन एक मध्यम स्तर का, संतुलन आधारित और पीठ को पीछे की ओर मोडने वाला कठिन योगासन है। इसे सीधे करने से मांसपेशियों में खिंचाव या चोट आ सकती है।
वृक्षासन- एक पौर पर संतुलन बनाने की क्षमता बढ़ाता है, जो नटराजासन के लिए सबसे बुनियादी जरूरत है।
आंजनेयासन- यह आसन शरीर को नटराजासन की गहरी और कठिन मुद्रा के लिए पूरी तरह तैयार करता है। साथ ही, यह हिप फ्लेक्सर्स और जांघों के सामने के हिस्से को गहरा स्ट्रेच देता है।
धनुरासन- योग विज्ञान के अनुसार, धनुरासन एक ‘फाउंडेशन बैकबेंड’ (बुनियादी पीछे झुकने वाला आसन) है जो शरीर को नटराजासन जैसे अधिक कठिन और एडवांस संतुलन वाले आसन के लिए पूरी तरह तैयार करता है। यह कंधों, छाती और जांघों को एक साथ स्ट्रेच करता है।
भुजंगासन- नटराजन आसन में एक पैर पर खड़े होकर शरीर को पीछे की ओर खींचना होता है, जिसके लिए मजबूत पीठ और बेहतर संतुलन की आवश्यकता होती है। भुजंगासन शरीर के पिछले हिस्से को मजबूत कर इस कठिन संतुलन को आसान बनाता है।
वीरभद्रासन- वीरभद्रासन शरीर को नटराजासन जैसी कठिन और गहरी बैकबेंड स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार किया जाता है।। इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी लचीली हो जाती है, जिससे नटराजासन करते समय पीठ के निचले हिस्से में चोट लगने का खतरा खत्म हो जाता है।
एकपाद राजकपोतासन – यह कूल्हों को खोलता है, जिससे पैर को पीछे और ऊपर की तरफ ले जाना आसान हो जाता है। यह आसन नटराजासन के लिए एक अनिवार्य प्रारंभिक (प्रिपरेटरी) आसन के रूप में काम करता है। नटराजासन एक बेहद कठिन, संतुलन और गहरे बैकबेंड (पीछे झुकने) वाला आसन है, जिसके लिए शरीर का पूरी तरह से खुला होना जरूरी है।



