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Tuesday, October 6, 2026
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US ने आतंकी हमले के शक में ब्रिटेन से B-52 और B-1 बॉम्बर वापस बुलाए

आतंकी खतरे के बीच बड़ा फैसला

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US एयर फ़ोर्स ने इंग्लैंड में अपने बेस से बॉम्बर वापस बुला लिए हैं, जिसका इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए किया जा रहा था। यह बात RAF फेयरफ़ोर्ड में संभावित आतंकी हमले की जांच शुरू होने के बाद कही गई है। पेंटागन के एक अधिकारी ने रविवार को नाम न बताने की शर्त पर कहा कि बॉम्बर को US में उनके बेस पर वापस भेज दिया गया है, क्योंकि उन्हें सेंसिटिव मिलिट्री एक्टिविटीज़ पर बात करने का अधिकार नहीं था।

एयरक्राफ़्ट मूवमेंट पर नज़र रखने वाले ग्रुप, जैसे कि मिलिट्री एयर ट्रैकिंग अलायंस, ने ईरान-इराक युद्ध शुरू होने के बाद से RAF फेयरफ़ोर्ड से दर्जनों B-52 और B-1 बॉम्बर को ऑपरेट करते देखा है। रविवार को कुछ B-1 बॉम्बर को बेस से उड़ान भरते भी देखा गया।

यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ युद्ध के लिए नए हमलों सहित कई ऑप्शन पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, ट्रंप ने शुरू में अमेरिकी जनता को भरोसा दिलाया था कि यह कैंपेन सिर्फ़ कुछ हफ़्तों तक चलेगा।

शनिवार को ईरान के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “मुझे ईरान पर कुछ फ़ैसले लेने हैं। ईरान को बड़े पैमाने पर तबाह कर दिया गया है। तो अब सवाल यह है कि यह आसान तरीके से किया जाएगा या मुश्किल तरीके से।” इस बीच, सितंबर के आखिर में RAF फेयरफ़ोर्ड में एक सिक्योरिटी घटना के बाद आतंकवादी हमले की साज़िश रचने के शक में पिछले हफ़्ते सेंट्रल लंदन में एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को गिरफ़्तार किया गया था। जांच के दौरान कुल छह लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया।

ब्रिटिश अधिकारियों ने इस घटना को तेहरान से जोड़ा है। हालांकि, ईरान ने इस घटना में शामिल होने से इनकार किया है। दूसरी ओर, ईरान ने पहले कहा है कि उसकी ज़मीन पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी मिलिट्री बेस को एक सही टारगेट माना जाएगा।

ब्रिटिश अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से जुड़े प्रॉक्सी ग्रुप ब्रिटेन और दूसरे देशों में आगजनी और दूसरे हमलों के पीछे पाए गए हैं। इनमें से कई हमलों में यहूदी समुदायों को निशाना बनाया गया था और इनका मकसद डर का माहौल बनाना था। ब्रिटिश अधिकारियों ने पहले यह भी चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष जारी रहता है तो तेहरान ब्रिटेन में अपने टारगेट बढ़ा सकता है।

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