US के न्यू मैक्सिको की एक कोर्ट ने फेसबुक, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा को $25 बिलियन (2.35 लाख करोड़ रुपये) देने का आदेश दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े एक मामले में, एक जूरी (जजों के एक ग्रुप) ने पाया कि एक पॉलिटिकल कंसल्टिंग फर्म ने लाखों फेसबुक यूज़र्स का डेटा उनकी सहमति के बिना हासिल किया था।
मेटा ने पहले ही फैसले के खिलाफ अपील करने का अपना इरादा बताया है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज फ्रांसिस जे. मैथ्यूज ने अपने फैसले में लिखा कि फेसबुक का व्यवहार जानबूझकर किया गया था। कंपनी के अधिकारियों ने लगातार यूज़र्स को इस बारे में गुमराह किया कि प्लेटफॉर्म कैसे काम करता है। उन्होंने कहा कि फेसबुक ने यूज़र्स को भरोसा दिलाया कि उनके डेटा पर उनका कंट्रोल होगा, यह दावा झूठा था।
जूरी ने पाया कि मामले में कंपनी के 29 में से 26 बयान गुमराह करने वाले थे। कंपनी ने 4.3 मिलियन से ज़्यादा राज्य कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानूनों का उल्लंघन किया। यह संख्या न्यू मैक्सिको में फेसबुक यूज़र्स या निवासियों की संख्या पर आधारित थी।
राज्य के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज़ ने कहा कि इस फ़ैसले को टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए एक वेक-अप कॉल के तौर पर देखा जाना चाहिए। यह फ़ैसला सिलिकॉन वैली के लिए एक साफ़ मैसेज है: न्यू मेक्सिको ऐसी कंपनियों को ज़िम्मेदार ठहराएगा।
मामला क्या है?
ब्रिटिश पॉलिटिकल कंसल्टिंग फ़र्म कैम्ब्रिज एनालिटिका ने एक थर्ड-पार्टी ऐप के ज़रिए लगभग 87 मिलियन Facebook यूज़र्स का पर्सनल डेटा इकट्ठा किया। राज्य के अटॉर्नी जनरल ने 2021 में मेटा के ख़िलाफ़ एक केस किया, जिसमें मेटा पर आरोप लगाया गया कि उसने न्यू मेक्सिको में Facebook यूज़र्स से डेटा कैसे हासिल किया, उसने हेट स्पीच और गलत जानकारी को कैसे हैंडल किया, और दूसरी अंदरूनी पॉलिसी के बारे में झूठ बोला।
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