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Thursday, October 29, 2026
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टीवीके की 85% सीटों पर नजर, सहयोगियों की ज्यादा हिस्सेदारी की मांग!

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के सहयोगी दलों के साथ बातचीत करने की उम्मीद है, ताकि उन्हें 15 प्रतिशत सीटों के प्रस्तावित बंटवारे को स्वीकार करने के लिए मनाया जा सके।

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (टीवीके) स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेतृत्व लगभग 85 प्रतिशत सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है, जबकि बाकी 15 प्रतिशत सीटें अपने सहयोगियों के लिए छोड़ने का प्रस्ताव है।

जनवरी 2027 में होने वाले चुनावों को पार्टी के भीतर उसकी जमीनी ताकत, खासकर ग्रामीण इलाकों में और महिलाओं, कामगारों, युवाओं तथा मतदाताओं के अन्य वर्गों से समर्थन जुटाने की उसकी क्षमता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर प्रस्तावित फॉर्मूला बातचीत के दौरान एक चुनौती बन सकता है। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग समेत गठबंधन के सहयोगी दल ज्यादा सीटों और मेयर जैसे पदों पर मौका मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

गठबंधन के कुछ सहयोगी दल कुछ नगर निगमों और नगर पालिकाओं पर अपना नियंत्रण रखने की मांग करने पर भी विचार कर रहे हैं।

वहीं, टीवीके सभी नगर निगमों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहती है, जिससे नेतृत्व के पदों का बंटवारा एक और विवादित मुद्दा बन सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के सहयोगी दलों के साथ बातचीत करने की उम्मीद है, ताकि उन्हें 15 प्रतिशत सीटों के प्रस्तावित बंटवारे को स्वीकार करने के लिए मनाया जा सके।

गठबंधन के सहयोगी दल टीवीके को सत्ता में लाने में अपने समर्थन का हवाला देते हुए, अधिक प्रतिनिधित्व की मांग पर अड़े हुए हैं।

गठबंधन की बातचीत के साथ-साथ टीवीके ने ऐसे उम्मीदवारों की पहचान करना शुरू कर दिया है, जो डीएमके और एआईएडीएमके के नेटवर्क को टक्कर दे सकें। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि मंत्री, विधायक और जिला सचिव चुनाव तैयारियों का नेतृत्व करेंगे।

उन निर्वाचन क्षेत्रों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है, जहां टीवीके की जीत की प्रबल संभावना है। उम्मीदवार के चयन में स्थानीय प्रभाव और जनता के साथ लगातार जुड़ाव को अहम आधार माना जाएगा।

नगर निगमों, नगर पालिकाओं और पंचायतों में पद पार्टी के भविष्य के विस्तार के लिए बहुत अहम माने जाते हैं। नेतृत्व का मानना ​​है कि इन संस्थाओं में मजबूत उपस्थिति होने से संगठन को अधिक संगठित करने और विभिन्न समुदायों के साथ संबंध मजबूत करने में मदद मिलेगी।

पार्टी उन लोगों को प्राथमिकता देगी, जिन्होंने पार्टी के लिए काम किया है और जिनका अपने इलाकों में पहले से ही एक मजबूत जनाधार है।

पार्टी पदाधिकारियों ने माना कि केवल सीएम विजय की लोकप्रियता ही चुनाव जीतने के लिए काफी नहीं हो सकती, क्योंकि ऐसे चुनावों में उम्मीदवारों की लोगों तक पहुंच और स्थानीय निवासियों के साथ उनके संबंध भी बहुत मायने रखते हैं।

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