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Monday, November 2, 2026
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सर्दियों में बढ़ते एक्यूआई के बीच घर को प्रदूषण मुक्त रखने के वैज्ञानिक उपाय​!

वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा विकसित 'समीर' ऐप का उपयोग करना चाहिए, जो वास्तविक समय में एक्यूआई डेटा प्रदान करता है।

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सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है। बाहरी धुंध और स्मॉग को देखकर घर के भीतर सुरक्षित महसूस करना एक आम धारणा है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और विभिन्न शोध स्पष्ट करते हैं कि घर के अंदर भी प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक हो सकता है।

सर्दियों में ठंड से बचने के लिए दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने से प्रदूषक तत्व घर के भीतर बंद हो जाते हैं। ऐसे में घर को एक सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त आश्रय बनाने के लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपायों को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

खराब वेंटिलेशन के कारण बाहर का सूक्ष्म पार्टिकुलेट मैटर (पीएम2.5 और पीएम10) घर के भीतर जमा हो जाता है। इसके अतिरिक्त, घर के भीतर की सामान्य गतिविधियां भी प्रदूषण को कई गुना बढ़ा देती हैं। खाना पकाना, अगरबत्ती और धूपबत्ती जलाना, और सूखी झाड़ू का उपयोग हानिकारक कणों और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (वीओसी) को बढ़ाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक जलती हुई मच्छर कॉइल या अगरबत्ती लगभग 75–100 सिगरेट के बराबर पार्टिकुलेट मैटर उत्पन्न कर सकती है। साथ ही, एसेंशियल ऑयल डिफ्यूजर भारी मात्रा में वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) छोड़ते हैं, जो श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा विकसित ‘समीर’ ऐप का उपयोग करना चाहिए, जो वास्तविक समय में एक्यूआई डेटा प्रदान करता है।

घर की हवा को साफ करने के लिए ट्रू हेपा फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर का उपयोग सबसे प्रभावी माना जाता है, जो 0.3 माइक्रोन तक के 99.97 प्रतिशत कणों को सोख लेते हैं। गैसों और वीओसी को हटाने के लिए हेपा फिल्टर के साथ एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर का संयोजन अत्यंत लाभकारी होता है।

आयनाइजर या ओजोन उत्पन्न करने वाले प्यूरीफायर से बचना चाहिए, क्योंकि ये द्वितीयक प्रदूषक उत्पन्न कर सकते हैं। मशीन का चयन करते समय कमरे के आकार के अनुसार उचित ‘क्लीन एयर डिलीवरी रेट’ (सीएडीआर) का ध्यान रखना बेहद आवश्यक हो जाता है।

सर्दियों में कमरे को गर्म रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। ब्लोअर या हैलोजन हीटर हवा को शुष्क कर देते हैं, जबकि ‘ऑयल-फिल्ड रेडिएटर’ (ओएफआर) हवा की नमी और ऑक्सीजन को नष्ट नहीं करते, जिससे वे श्वसन स्वास्थ्य के लिए सर्वाधिक सुरक्षित माने जाते हैं।

तकनीक के साथ-साथ प्राकृतिक उपाय भी महत्वपूर्ण होते हैं। नासा के विस्तृत शोध के अनुसार, कुछ विशेष पौधे इनडोर वायु गुणवत्ता को प्राकृतिक रूप से सुधारने में अभूतपूर्व भूमिका निभाते हैं। एरेका पाम दिन के समय कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदलता है। प्रति व्यक्ति कंधे की ऊंचाई वाले 4 पौधों की आवश्यकता होती है।

स्नेक प्लांट रात में भी ऑक्सीजन का निर्माण करता है, जिससे इसे बेडरूम के लिए आदर्श माना जाता है।​ मनी प्लांट हवा से फॉर्मलाडेहाइड और अन्य हानिकारक वाष्पशील रसायनों को हटाने में सक्षम होता है।

सफाई के दौरान सूखी झाड़ू लगाने से धूल के कण हवा में फिर से उड़ने लगते हैं, इसलिए गीले पोंछे का उपयोग करना चाहिए। सर्दियों की शुष्क हवा श्वसन नलिका को संवेदनशील बना देती है। इसलिए घर के अंदर नमी का स्तर 30 से 50 प्रतिशत के बीच बनाए रखना चाहिए, जो फेफड़ों को आराम देता है और धूल के कणों को उड़ने से रोकता है।

घर को स्वच्छ रखने के साथ-साथ प्रदूषण से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना भी आवश्यक हो जाता है। आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, आहार में विटामिन सी, आंवला और गुड़ को शामिल करने से श्वसन तंत्र को मजबूती मिलती है।

गुड़ में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फेफड़ों में जमा होने वाले सूक्ष्म कणों और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने (डिटॉक्सिफाई करने) में विशेष रूप से सहायक होते हैं।​ 
 
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