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Friday, October 30, 2026
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गर्भपात ​को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

एक 25 वर्षीय महिला ने दिल्ली की एक अदालत में एक याचिका दायर कर 23 सप्ताह और पांच दिन के भ्रूण को सहमति से गर्भपात करने की अनुमति मांगी। युवती के साथी ने शादी को ठुकरा दिया था और अविवाहित रहते हुए बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती थी।​

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गर्भपात पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है​|​​ सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर महिला, चाहे विवाहित हो या अविवाहित, सहमति से यौन संबंध बनाने के बाद गर्भवती हो जाती है, उसे सुरक्षित गर्भपात​​ का अधिकार है। विशेष रूप से, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अविवाहित महिलाओं को गर्भपात के अधिकार से वंचित करना असंवैधानिक है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा​ की सभी महिलाओं को सुरक्षित और कानूनी गर्भपात का अधिकार है। गर्भपात अधिनियम, 2021 के प्रावधान विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच अंतर नहीं करते हैं। यदि अधिनियम के 3 बी (सी) का प्रावधान केवल विवाहित महिलाओं के लिए है, तो यह पूर्वाग्रह होगा कि केवल विवाहित महिलाओं को ही यौन संबंधों का अधिकार है। यह दृष्टिकोण संवैधानिक परीक्षण से नहीं बचेगा।

​महिलाओं को गर्भपात के बारे में फैसला करने की पूरी आजादी होनी चाहिए। विवाहित और अविवाहित दोनों महिलाओं को प्रजनन का अधिकार है। एमटीपी अधिनियम 20-24 सप्ताह की गर्भवती महिलाओं को गर्भपात का अधिकार देता है। हालांकि, अगर यह अधिकार केवल विवाहित महिलाओं को दिया जाता है और अविवाहित महिलाओं को इससे बाहर रखा जाता है, तो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा।

​भ्रूण का अस्तित्व महिला के शरीर पर निर्भर करता है। इसलिए गर्भपात का अधिकार महिलाओं की शारीरिक स्वतंत्रता का हिस्सा है। अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा, “अगर सरकार किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भधारण करने के लिए मजबूर करती है, तो यह महिला की गरिमा का हनन होगा। न्यायमूर्ति डी. वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति ए. एस। बोपन्ना और जे.डी.परदीवाला बेंच ने यह फैसला दिया।

​एक 25 वर्षीय महिला ने दिल्ली की एक अदालत में एक याचिका दायर कर 23 सप्ताह और पांच दिन के भ्रूण को सहमति से गर्भपात करने की अनुमति मांगी। युवती के साथी ने शादी को ठुकरा दिया था और अविवाहित रहते हुए बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती थी।​ इस याचिका पर सुनवाई करते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया कि अविवाहित महिलाओं को गर्भपात अधिनियम के तहत गर्भपात का अधिकार नहीं है। इसके बाद युवती ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।​
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