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Monday, January 12, 2026
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प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट पर सुप्रीम आदेश: नया मंदिर-मस्जिद विवाद दाखिल नहीं होगा, केंद्र को 4 हफ्ते में हलफनामा देने के आदेश!

अर्थात भोजशाला, ज्ञानवापी, संभल जैसे मामलों में सुनवाई तो चलती रहेगी, लेकिन उस पर कोर्ट अभी कोई फैसला नहीं दे सकेंगे।

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 दिसंबर) को प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट,1991 पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार की राय के बिना कोर्ट इस पर आदेश जारी नहीं कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार जब तक वे केस को सुन रहें है, तब तक देशभर में इस तरह के नए मामले पर सुनवाई नहीं होगी। यानी विवाद की स्थिति में मुकदमे तो दाखिल होंगे, लेकिन ट्रायल कोर्ट उस पर कोई सुनवाई नहीं करेंगे।

अर्थात भोजशाला, ज्ञानवापी, संभल जैसे मामलों में सुनवाई तो चलती रहेगी, लेकिन उस पर कोर्ट अभी कोई फैसला नहीं दे सकेंगे। चार हफ्ते तक तक आदेश देने पर रोक लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले से पहले प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट, 1991 को लेकर केंद्र सरकार द्वारा इसकी वैधानिकता की राय जानना चाहती है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से महत्वपूर्ण मुद्दे:

  1. देशभर में मंदिर-मस्जिद के ऐसे नए मामलों पर सुनवाई नहीं होगी।
  2. केंद्र चार हफ्ते में हलफनामा दाखिल करे, सुप्रीम कोर्ट केंद्र के जवाब के बिना फैसला नहीं कर पाएगा।
  3. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि, हम केंद्र सरकार का इस मामले में पक्ष जानना चाहते।
  4. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा है की, सिविल कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रोक नहीं लगा सकती, पहले ही पांच जजों ने इस पर फैसला दिया है।

दौरान जमीयत उलेमा ए हिन्द, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ कई राजनीतिक दलों ने ऐक्ट के समर्थन में आवेदन दाखिल किया है। कहा जा रहा है इन्हीं सगठनों ने धार्मिक स्थलों के सर्वे से जुड़े अलग-अलग अदालतों के आदेशों का भी विरोध किया है, इसी कारण से कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को राहत देते हुए ही विवादित मामलों में फैसले पर रोक लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, लंबित मामलों में सुनवाई जारी रहेगी। अगली सुनवाई की तारीख तक कोई प्रभावी अंतरिम/अंतिम आदेश/सर्वेक्षण पारित नहीं किया जा सकता। यानि ज्ञानवापी, मथुरा, भोजशाला संभल जैसे मामलों की कार्यवाही में कोई नया आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

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दौरान प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट 1991 की वैधता को लेकर अश्विनी उपाध्याय की याचिका लंबित है। उन्होंने इस एक्ट की धारा दो, तीन और चार को रद्द किए जाने का अनुरोध किया है। उनका एक तर्क यह भी है की धारा दो, तीन और चार से प्रावधान किसी व्यक्ति या धार्मिक समूह के पूजा स्थल पर पुन: दावा करने के न्यायिक समाधान के अधिकार को छीन लेते हैं। वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका दायर करते हुए सुप्रीम कोर्ट को इस कानून के प्रावधानों की व्याख्या करने की मांग की जिससे की हिंदू वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद पर दावा करने के लिए सक्षम हो सकें।

वहीं कम्युनिस्ट पार्टी, जितेंद्र आव्हाड ने सार्वजनिक व्यवस्था, बंधुत्व, एकता और धर्मनिरपेक्षता का हवाला देते हुए इस एक्ट के विरोध में आयी सभी याचिकाओं का विरोध करने वाली याचिका दायर की है। इस याचिका की सुनवाई अदालतों में दायर कई मुकदमों की पृष्ठभूमि में होगी, जिनमें वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद और संभल में शाही जामा मस्जिद से संबंधित मुकदमे शामिल हैं।

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