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Thursday, April 9, 2026
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भारत में DII की खरीदारी लगातार दूसरे वर्ष 5 लाख करोड़ के पार!

FII बिकवाली के बीच बाजार को मिला सहारा

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भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। प्रोविजनल एनएसई डेटा के मुताबिक, 2025 में अब तक म्यूचुअल फंड, बैंक, बीमा कंपनियां और अन्य घरेलू संस्थानों ने 5.13 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की है। यह लगातार दूसरा साल है जब डीआईआई का निवेश 5 लाख करोड़ रुपए के स्तर को पार कर गया है। 2024 में उन्होंने रिकॉर्ड 5.25 लाख करोड़ रुपए की खरीदारी की थी।

इसके विपरीत, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे हैं। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने 2025 में अब तक सेकेंडरी मार्केट से 1.6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है, जबकि 2024 में लगभग 1.21 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली की थी।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट बताती है कि दलाल स्ट्रीट पर हालिया अस्थिरता और एफपीआई की आक्रामक बिकवाली के बावजूद डीआईआई की खरीदारी का स्तर 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और 2022 की भारी बिकवाली से भी कहीं अधिक रहा है। डीआईआई के प्रवाह ने न सिर्फ एफआईआई के दबाव को कम किया बल्कि प्रमोटरों की बड़ी हिस्सेदारी की बिक्री और प्राइवेट इक्विटी फंडों की मुनाफावसूली का असर भी संतुलित किया।

हालांकि, इतनी मजबूत घरेलू खरीदारी के बावजूद बाजार में व्यापक लाभ नहीं दिखा। पिछले 12 महीनों में सभी मार्केट कैप इंडेक्स ने या तो स्थिर प्रदर्शन किया या गिरावट दर्ज की। 2025 में एक अस्थिर वर्ष के बाद, सेंसेक्स सालाना आधार पर केवल 1.96% ऊपर रहा और निफ्टी ने 3.28% की बढ़त दर्ज की। वहीं, बीएसई मिडकैप में 3.8% और बीएसई स्मॉलकैप में 6.7% से अधिक की गिरावट आई।

विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू मोर्चे पर स्थिति सकारात्मक है। पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही, जो उम्मीद से काफी बेहतर है। इसके अलावा, बजट में किए गए राजकोषीय प्रोत्साहन और मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों का असर आने वाले महीनों में और स्पष्ट होगा। प्रस्तावित जीएसटी सुधार भी विकास की रफ्तार को बढ़ावा दे सकते हैं।

गौरतलब है कि डीआईआई प्रवाह 2025 में सालाना आधार पर निफ्टी के औसत बाजार पूंजीकरण के 2.2% तक पहुंच गया है, जो 2007 के बाद से सबसे ऊंचा स्तर है। विश्लेषक मानते हैं कि म्यूचुअल फंडों में लगातार आ रही भारी नकदी और घरेलू निवेशकों का भरोसा आने वाले महीनों में भी बाजार को स्थिरता देता रहेगा।

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