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प्रधानमंत्री आवास योजना में की ₹222 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग; ED ने ओशन सेवन बिल्डटेक जांच की तेज़

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प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत कथित रूप से किए गए एक बड़े घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब गुरुग्राम की रियल एस्टेट कंपनी ओशन सेवन बिल्डटेक (OSBPL) और उसके प्रमोटरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने गरीब और मध्यम आय वर्ग के लिए बनाई गई इस सरकारी योजना का दुरुपयोग करते हुए फ्लैट्स की फर्जी कैंसिलेशन, दोबारा बिक्री और अवैध धन शोधन का एक संगठित रैकेट खड़ा किया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, 13 नवंबर को गिरफ्तार किए गए कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर स्वराज सिंह यादव ने ऐसी प्रणाली चलाई, जिसमें PMAY के तहत आवंटित फ्लैटों को गलत कारणों का हवाला देते हुए रद्द कर दिया जाता था और फिर उन्हें कहीं अधिक कीमत पर दोबारा बेच दिया जाता था। जिन खरीदारों को मूल रूप से फ्लैट मिले थे, उन्हें पैसे भी वापस नहीं किए गए, जिससे कंपनी को एक ही संपत्ति पर दोहरी कमाई का अवसर मिल गया। एक फ्लैट जिसकी कीमत 26.5 लाख रुपये थी, उसे 40 से 50 लाख रुपये तक में बेचा गया।

ED का दावा है कि इस कैंसिलेशन–रीसेल मॉडल और अनअकाउंटेड कैश डील्स के जरिए कंपनी ने लाखों रुपये की अतिरिक्त कमाई की। एजेंसी के मुताबिक, स्वराज यादव ने फर्जी कंपनियों और नकद प्रीमियम के जरिए 222 करोड़ रुपये से अधिक की रकम इकट्ठी की। निर्माण कार्य के लिए एस्क्रो खातों में रखी जानी चाहिए थी वह राशि भी कथित रूप से शेल कंपनियों में घुमा दी गई। पार्किंग स्लॉट की बिक्री में भी इसी तरह की कैश-आधारित प्रणाली अपनाई गई, जहां आधिकारिक रिकॉर्ड में बेहद कम रकम दिखाई जाती थी जबकि वास्तविक भुगतान नकद में लिया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि कार्रवाई से पहले यादव ने हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान में स्थित निजी और कंपनी की संपत्तियों को तेजी से बेचने की कोशिश की। ED का कहना है कि यह कदम संपत्तियों को जब्ती से बचाने के लिए उठाया गया। एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि यादव की पत्नी 2025 में अमेरिका चली गईं और उनके नाम के बैंक खाते के जरिए हवाला मार्ग से विदेशों में धन भेजा गया। हालांकि यादव की ओर से दलील दी गई कि मामले से संबंधित कई FIRs सेटल हो चुकी हैं, लेकिन अदालत ने इसे मानने से इंकार कर दिया। 14 नवंबर को ED को 14 दिन की कस्टडी दी गई, जिसके बाद से यादव न्यायिक हिरासत में हैं।

प्रवर्तन निदेशालय अब कंपनी की संपत्तियों का मूल्यांकन कर रहा है, ताकि PMLA के तहत उनकी कुर्की की जा सके और भविष्य में प्रभावित होमबायर्स को मुआवजा दिया जा सके। इस घोटाले में कथित रूप से धुंधले लेनदेन, फर्जी दस्तावेज, नकद वसूली और संपत्ति छिपाने की कोशिशों का बड़ा जाल सामने आया है। एजेंसी जल्द ही विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल करने की उम्मीद कर रही है, जिससे PMAY से जुड़े इस कथित 222 करोड़ रुपये के घोटाले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

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