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भारत ‘डेड इकोनॉमी’?: बिग टेक कंपनियों से भारत में 6.12 लाख करोड़ से अधिक निवेश की घोषणा

ट्रंप को का करारा झटका

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही दुनिया भर की टेक कंपनियों को अमेरिका फर्स्ट की घुट्टी पिलाने में लगे है, इसी कारण मंगलवार (9 दिसंबर) का दिन उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रहा। बीते कुछ हफ्तों में माइक्रोसॉफ्ट , अमेज़न , गूगल, इंटेल जैसी दिग्गज कंपनियों ने भारत में 68 अरब डॉलर (लगभग ₹6.12 लाख करोड़) से अधिक का निवेश करने का वादा किया है और इनमें से अधिकांश निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर केंद्रित होने वाला है। यह बिल्कुल उसके विपरीत है जिसे ट्रंप डेड इकोनॉमी बता रहे थे।

भारतीय मूल के माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्य नडेला ने मंगलवार (9 दिसंबर)को मोदी से मुलाकात के बाद अगले चार वर्षों में $17.5 बिलियन के निवेश का ऐलान किया, यह एशिया में माइक्रोसॉफ्ट का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। नडेला ने कहा कि यह निवेश भारत के भविष्य के लिए स्किल, इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता विकसित करेगा।

इससे पहले भी माइक्रोसॉफ्ट जनवरी 2025 में $3 बिलियन की घोषणा कर चुका है। कंपनी हैदराबाद में 2.65 लाख वर्ग फुट कार्यालय भी ले चुकी है और वह 2030 तक 2 करोड़ भारतीयों को AI-ट्रेनिंग देने की योजना पर दोगुना जोर लगा रही है। इसके बाद अमेज़न ने 2030 तक $35 बिलियन निवेश का ऐलान किया है, जिसका बड़ा हिस्सा AI इंफ्रास्ट्रक्चर में लगेगा। गूगल ने कुछ दिन पहले ही विशाखापत्तनम में $15 बिलियन की लागत से 1 GW डेटा सेंटर क्लस्टर स्थापित करने का निर्णय लिया।

दूसरी ओर, दुनिया की सबसे अहम चिप निर्माता कंपनियों में से एक Intel ने भी भारत पर बड़ा भरोसा जताया। इंटेल के CEO लिप-बू टैन ने पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को समर्थन देने का वादा किया। इसके कुछ घंटों पहले, Intel ने टाटा समूह के साथ MoU साइन कर लिया, जिसके तहत गुजरात और असम में बनने वाले टाटा के चिप प्लांट्स में इंटेल के उत्पादों का निर्माण और पैकेजिंग होगी। इससे भारत पहली बार किसी बड़े अमेरिकी चिपमेकर का ग्राहक बनेगा।

Cognizant के CEO रवि कुमार एस ने भी भारत में विस्तार, AI-इंटीग्रेशन और नई नौकरियों को लेकर सरकार से चर्चा की। भारत तेजी से वैश्विक AI हब बन रहा है। OpenAI ने दिल्ली में अपना पहला भारतीय कार्यालय खोला है। मेटा का नया बड़ा ऑफिस जल्द ही बेंगलुरु में खुलने जा रहा है। गूगल ने बेंगलुरु का विशाल अनंता कैम्पस लॉन्च किया है । एप्पल, लैम रिसर्च और एनवीडिया की कोहेसिटी ने भी $3.7 बिलियन से अधिक निवेश का वादा किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत सरकार की AI मिशन नीति, डेटा सेंटर पर जोर देना, चिप निर्माण के लिए प्रतिबद्ध होना और विशाल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपलब्ध होना इन सभी ने भारत को निवेश का केंद्र बना दिया है। ट्रंप ने अमेरिकी टेक कंपनियों से कहा था, “AI की दौड़ जीतने के लिए सिलिकॉन वैली को अमेरिका-फर्स्ट होना पड़ेगा। हमें चाहिए कि आप अमेरिका के लिए ऑल-इन हों।”

लेकिन दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों ने इस भू-राजनीतिक उठापठक से दूर रहना चाहती है। भारत को AI-टैलेंट, विशाल बाज़ार, डिजिटल स्केल और डेटा विविधता के कारण बेहतर संभावनाओं वाला राष्ट्र माना जा रहा है। वैंचर कैपिटलिस्ट डीडी दास ने भी लिखा, “पिछले कुछ दिनों में बिग टेक ने भारत में 68 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की है। अमेरिका के बाद भारत उनका सबसे बड़ा राजस्व स्रोत बनने जा रहा है।”

दिलचस्प बात यह रही कि इसी महीने ट्रंप के अपने बिज़नेस ग्रुप ने भी हैदराबाद में ₹1 लाख करोड़ तक के निवेश की घोषणा की है। उनके मीडिया ग्रुप के डायरेक्टर एरिक स्विडर ने तक कहा कि भारत टेक्नोलॉजी में दुनिया का नेतृत्व करेगा। यही कारण है कि कई विश्लेषकों ने इसे ट्रंप की दोहरे मापदंड की राजनीति का सबसे सटीक उदाहरण बताया।

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