भारत-EU व्यापार समझौता: भारतीय उपभोक्ताओं के लिए क्या-क्या हो सकता है सस्ता?

भारत-EU व्यापार समझौता: भारतीय उपभोक्ताओं के लिए क्या-क्या हो सकता है सस्ता?

India-EU trade agreement: What could become cheaper for Indian consumers?

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौता (FTA) बाद दोनों ओर व्यापर और निवेश संबंधों में  बड़े बदलाव होने जा रहें है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता बताया है, जबकि दुनियाभर के विशेषज्ञ इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रहें है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ऊँचे आयात शुल्क घटाकर व्यापार को आसान और सस्ता बनाना है, ताकि दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल सके।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन ने कहा है कि भारत और EU मिलकर लगभग दो अरब लोगों का एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बना रहे हैं, जिससे दोनों पक्षों को आर्थिक लाभ होगा। व्यापार के साथ-साथ EU भारत की कार्बन उत्सर्जन परियोजनाओं में मदद करने हेतु 500 मिलियन यूरो के निवेश की भी योजना बना रहा है। समझौते का एक अहम पहलू यह भी है कि यूरोपीय कार निर्माताओं को भारत में कम शुल्क पर सालाना 2.5 लाख तक वाहनों के आयात की अनुमति दी जाएगी, जो हालिया अन्य व्यापार समझौतों की तुलना में कहीं अधिक है।

नए मुक्त व्यापार समझौते के तहत मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उपकरणों पर अभी लगने वाले 44 प्रतिशत तक के टेर्रिफ शून्य हो जाएंगे। इससे फैक्ट्रियों, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली यूरोपीय मशीनें सस्ती पड़ेंगी और लंबे समय में तैयार उत्पादों की कीमतें भी घट सकती हैं। एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट पार्ट्स पर 11 प्रतिशत तक के शुल्क हटाए जाएंगे, जिससे एविएशन और मेंटेनेंस सेक्टर की लागत घटेगी।

मेडिकल, ऑप्टिकल और सर्जिकल उपकरणों पर लगने वाले 27.5 प्रतिशत तक के टेर्रिफ 90 प्रतिशत उत्पादों के लिए शून्य हो जाएंगे, जिससे अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम होने की उम्मीद है। प्लास्टिक, केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भी टेर्रिफ घटने से दवाइयों और रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पादों पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।

सबसे बड़ा बदलाव मोटर वाहनों में दिखेगा, जहां आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो सकता है, हालांकि यह 2.5 लाख वाहनों की वार्षिक सीमा के भीतर होगा। इससे प्रीमियम और लग्ज़री कारें अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं।

यूरोपीय वाइन, बीयर और स्पिरिट्स पर शुल्क में बड़ी कटौती की गई है। प्रीमियम वाइन पर शुल्क 150 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत, मिड-रेंज वाइन पर 30 प्रतिशत और स्पिरिट्स पर 40 प्रतिशत रह जाएगा।

ऑलिव ऑयल और अन्य वेजिटेबल ऑयल पर 45 प्रतिशत तक के शुल्क शून्य हो जाएंगे, जिससे घरों और रेस्तरां को सीधा फायदा मिल सकता है। बिस्किट, ब्रेड, पास्ता, चॉकलेट और पालतू जानवरों के भोजन जैसे प्रोसेस्ड फूड पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटकर शून्य हो जाएंगे।

कीवी और नाशपाती जैसे फलों पर भी शुल्क घटेगा, हालांकि यह आयात कोटा पर निर्भर करेगा।

भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है की, EU अगले सात सालों में 99.5 प्रतिशत वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाएगा। इससे यूरोपीय वाइन, ऑलिव ऑयल, प्रोसेस्ड फूड, मेडिकल डिवाइसेज़, लग्ज़री कारें और कुछ विशेष औद्योगिक व फार्मा उत्पादों के सस्ते होने की संभावना है। हालांकि, कीमतों में गिरावट तुरंत नहीं दिखेगी। कई शुल्क कटौतियां चरणबद्ध होंगी और अंतिम कीमतें लॉजिस्टिक्स, घरेलू टेर्रिफ और कंपनियों की मूल्य नीति पर भी निर्भर करेंगी। फिर भी, यह समझौता भारतीय बाजार में लंबे समय में अधिक विकल्प और प्रतिस्पर्धी कीमतें लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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