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2030 तक 103.5 अरब डॉलर का होगा भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार!

तक 1.6 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

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भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार आने वाले वर्षों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज करेगा। क्वेस कॉर्प की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बाज़ार 2025 में 54.3 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 103.5 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। यानी, लगभग 13.8% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के साथ यह वैश्विक औसत से भी तेज़ गति से आगे बढ़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, अभी भी भारत का सेमीकंडक्टर उपयोग मुख्य रूप से स्मार्टफोन, लैपटॉप और इंडस्ट्रियल सिस्टम जैसे रोज़मर्रा के उपकरणों पर आधारित है, जिनकी हिस्सेदारी कुल बाज़ार में करीब 70% है। लेकिन आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों, 5G रोलआउट और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग इस सेक्टर को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। अनुमान है कि 2030 तक हाइपरस्केल डेटा क्षमता में 75% से अधिक की वृद्धि होगी और ईवी बिक्री नए वाहनों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बन जाएंगी।

सरकारी पहल और बड़े निवेश

भारत सरकार की सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) इस दिशा में आधार तैयार कर रही है। अब तक 1.6 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है, जिससे करीब 29,000 नई नौकरियां सृजित होंगी। इसी क्रम में, गुजरात में माइक्रोन का ATMP प्लांट पैकेजिंग और टेस्टिंग को मजबूती दे रहा है, जबकि तमिलनाडु, केरल और गुजरात जैसे राज्यों की पहल से टियर-2 क्लस्टर्स उभर रहे हैं।

क्वेस कॉर्प के आईटी स्टाफिंग सीईओ कपिल जोशी ने कहा, “भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग एक निर्णायक दशक में प्रवेश कर रहा है। सरकार ISM 2.0 को तेजी से आगे बढ़ा रही है, जिसके 10 अरब डॉलर से अधिक होने की संभावना है। अवसर बड़े हैं, लेकिन टैलेंट तैयार करने में चुनौतियां भी सामने हैं।”

तकनीक और टैलेंट की नई उड़ान

भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अब सिर्फ बैक-एंड सपोर्ट तक सीमित नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आधे से ज्यादा नए चिप प्रोग्राम्स में AI एक्सेलेरेटर्स शामिल हैं और एक-तिहाई वेरिफिकेशन टीम्स मशीन लर्निंग का उपयोग कर रही हैं। भारतीय इंजीनियर अब मल्टी-डाई इंटीग्रेशन, TinyML फर्मवेयर, AI-ड्रिवन डिज़ाइन जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

फिलहाल भारत में 2.5 लाख सेमीकंडक्टर पेशेवर मौजूद हैं और 2024-25 में ही 43,000 नई भर्तियां हो चुकी हैं। अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 4 लाख के करीब पहुंच जाएगी। इसके साथ ही भारत, अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर टैलेंट हब बन जाएगा। यानी आने वाले वर्षों में भारत न केवल एक बड़ा उपभोक्ता, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का अहम खिलाड़ी बनने की राह पर है।

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